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हाथरस : जिले की सियासत में फिर भाजपा का दबदबा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले की सियासत में फिर भाजपा का दबदबा कायम हुआ है। भाजपा ने लंबे अरसे जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा किया है। इसमें पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की अहम भूमिका रही है। पहले उन्होंने अपने दम पर अपनी पत्नी सीमा उपाध्याय को निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य जितवाया। इसके बाद उन्हें भाजपा में शामिल करा जिला पंचायत अध्यक्ष का उम्मीदवार बनवाया। अब कांटे के मुकाबले में अपनी पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भी जितवा लिया।
जिले की सियासत में दूसरी बार भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाया है। सबसे पहले जब जिला पंचायत का सृजन हुआ था। तब भाजपा का इस पद पर कब्जा हुआ था। तब भी भाजपा सत्ता में थी। अब दूसरी बार भाजपा ने इस पद पर अपना कब्जा किया है। वैसे भी इस जिले में सांसद, सिकंदराराऊ और हाथरस विधानसभा सीट पर विधायक भाजपा के ही हैं।
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अब रामवीर उपाध्याय, जोकि बसपा से विधायक चुने गए थे, उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय भी भाजपा में शामिल हो गईं और वह भाजपा के समर्थन से ही जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई हैं। इसमें सबसे अहम भूमिका पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की है। जिले की सियासत में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने फिर अपने विपक्षियों को अपना लोहा मनवाया है।
वैसे भी जिला पंचायत की राजनीति में रामवीर उपाध्याय की शुरू से पकड़ रही है। उन्हीं की बदौलत बसपा पांच बार जिला पंचायत अध्यक्ष यहां से निर्वाचित हुआ। पिछली बार उनके भाई विनोद उपाध्याय ने भी कांटे की टक्कर में यह चुनाव जीता था। इस बार फिर सीमा उपाध्याय ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा तो उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय लड़ा। सीमा ने निर्दलीय चुनाव जीत लिया। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए अपना समर्थित उम्मीदवार बना लिया।
हालांकि कुछ भाजपाइयों को यह असहज भी हुआ, लेकिन बाद में रामवीर माहौल बनाने में जुट गए। हालांकि सीमा उपाध्याय पर नाम तो भाजपा समर्थित उम्मीदवार का लगा रहा, लेकिन उनके चुनाव का पूरा प्रबंधन रामवीर ने ही संभाला। वह खुद कई बार भाजपा कार्यालय गए। वहां पार्टी के नेताओं से गुफ्तगू की। उनके पुराने साथी व भाजपा नेता जयवीर सिंह ने यहां की चुनाव कमान अपने हाथ में ली। यह भी चुनावी रणनीति का हिस्सा ही था। रामवीर सदस्यों की नब्ज टटोलते रहे। पूरी व्यवस्था उन्होंने भाजपा नेताओं के सहयोग से खुद संभाली। ऐसे में रामवीर का चुनावी प्रबंधन काम भी आया और सीमा तीसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।
जिला पंचायत से ही शुरू की थी सीमा ने अपनी राजनीतिक पारी
हाथरस। बात यदि सीमा उपाध्याय की करें तो सीमा ने वर्ष 2000 से जिला पंचायत अध्यक्ष से ही अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। उसके बाद वर्ष 2005 में वह फिर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। तदुपरांत बसपा ने उन्हें फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ाया तो उन्होंने यह पद छोड़ दिया और वहां से सांसद चुन ली गईं। इसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने वहीं से बसपा से फिर चुनाव लड़ा, लेकिन इस चुनाव में वह हार गईं। इससे बाद उन्होंने फिर जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव जीता है। संवाद
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रामवीर ने अभी नहीं की है भाजपा में शामिल होने की घोषणा
हाथरस। सबसे दिलचस्प बात यह भी है कि रामवीर उपध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय, उनके भाई व बेटे भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय भाजपा से जिला पंचायत अध्यक्ष भी चुन ली गईं, लेकिन रामवीर अभी बसपा से ही निलंबित विधायक हैं। उन्होंने अभी भाजपा में जाने की घोषणा नहीं की है और उनका यही कहना है कि वह उचित समय पर उचित निर्णय लेंगे। संवाद
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