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हाथरस: न्याय की आस: गिन-गिन बीते 30 दिन

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हाथरस: बिटिया के गांव में घटनास्थल पर सीबीआई के आने से पूर्व लोगों की आवाजाही को रोकने के लिए डूनो? - फोटो : HATHRAS
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प्रशांत भारती
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काका हाथरसी की हास्य फुलझड़ियों पर मुस्कुराने वाला यह जिला पिछले एक महीने से बिटिया के साथ हुई दरिंदगी की घटना के बाद अभी तक सुलग रहा है। पूरे देश को इस घटना ने झकझोर कर रख दिया है। 14 सितंबर को इस बहुचर्चित प्रकरण की शुरुआत हुई। तब से लेकर अब तक तरह-तरह के आरोपों-प्रत्यारोपों ने मामले को उलझा दिया है, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष जारी है और उम्मीद है कि बिटिया को इंसाफ जरूर मिलेगा।
चंदपा क्षेत्र के गांव में 14 सितंबर को जब 19 साल की एक बिटिया अपनी मां के साथ घास काटने गई थी तो उस पर जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले की रिपोर्ट थाना चंदपा में धारा 307, एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज कर ली गई। गंभीर हालत में बिटिया को उपचार के लिए अलीगढ़ रेफर कर दिया गया। आरोपी युवक संदीप ठाकुर जाति का है और बिटिया वाल्मीकि जाति की थी। पुलिस इस मामले में शुरू से ही लीपापोती कर रही थी।
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वाल्मीकि समाज ने एसपी से इस मामले की शिकायत की और कोतवाली हाथरस सदर का घेराव किया। सांसद की बेटी मंजू दिलेर ने बिटिया को न्याय दिलाने के लिए डीजीपी को चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। उस समय इस मामले की विवेचना सीओ सिटी कर रहे थे। बाद में मामले की जांच सीओ सादाबाद के पास आ गई। उन्होंने 22 सितंबर को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में आकर बिटिया के बयान लिए।
तब बिटिया ने बताया कि दुष्कर्म में संदीप के अलावा तीन और युवक भी शामिल थे। उसके बाद मुकदमे में तीनों युवकों लवकुश, रामू व रवि के नाम बढ़ाए गए। सामूहिक दुष्कर्म की धारा 376 डी भी बढ़ाई। पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी। संदीप सहित चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए, लेकिन इस दौरान भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर की सक्रिय से मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं में आ गया।
इस प्रकरण पर राजनीति शुरू हो गई। देश में कई स्थानों पर घटना के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए। 28 सितंबर को बिटिया को अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल भेजा गया। वहां अगले दिन 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद पूरे देश की राजनीति में उबाल आ गया। विपक्ष केंद्र और प्रदेश सरकारों पर हमलावर हो गया। बिटिया की मौत के बाद उसके शव का परिजनों की बिना इजाजत के रात में पुलिस ने अंतिम संस्कार करा दिया। इस दौरान वहां जमकर हंगामा भी हुआ। योगी सरकार ने मामले को संभालने की कोशिश की। पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद दी गई।
शहर में आवास और नौकरी का भी आश्वासन दिया गया, लेकिन तब तक तीर हाथरस से निकल चुका था। हमलावर विपक्ष ने सरकार को इस प्रकरण में चारों तरफ से घेर लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और रालोद नेता जयंत चौधरी से लेकर वामदल, टीएमसी के नेता बिटिया के घर आए और वहां उसके परिवार वालों से घटना की जानकारी ली। पूरे देश में धरना-प्रदर्शन भी हुए। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात आई कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था। मथुरा में पीएफआई के चार एजेंट भी पकड़े गए। आरोपियों के पक्ष में ठाकुर समाज के लोगों ने भी पंचायतें शुरू कर दीं।
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निर्भया की वकील सीमा कुशवाहा और निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह भी गांव आए। दोनों अपने-अपने पक्ष के लोगों से मिले। आरोपी पक्ष इसे हॉरर किलिंग बता रहा है। इस मामले की जांच कई एजेंसियां कर रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम में तत्कालीन एसपी, सीओ सिटी, कोतवाल सहित छह पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं। एसआईटी, ईडी अपने-अपने हिसाब से छानबीन कर रही है। अब केस सीबीआई के पास है और सीबीआई की जांच भी तेजी से चल रही है। इस घटनाक्रम को शुरू हुए एक माह बीत गया है, लेकिन अभी यह पता नहीं है कि गुनहगारों को सजा दिलाने में सीबीआई को कितना वक्त लगेगा। तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच बिटिया के परिजनों को उम्मीद है कि न्याय जरूर मिलेगा।
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