न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
नगर निकाय के अध्यक्ष पद का आरक्षण होने के बाद जिले में राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं। शासन द्वारा आरक्षण घोषित होने के बाद कई बड़े नेताओं की चुनाव लड़ने की तमन्ना अधूरी रह गई है। शासन द्वारा घो षित इस आरक्षण से इन नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया है। कुछ नेताओं के चेहरे आरक्षण की घोषणा होने के बाद खिले नजर आए हैं। वह अब जोर-शोर से तैयारी में जुट गए हैं।
नगर निकाय चुनाव के अध्यक्ष पद के आरक्षण का हर राजनेता को काफी दिन से इंतजार था। यह नेता इसे लेकर काफी तैयारी कर रहे थे। सबसे ज्यादा तैयारी हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष के पद को लेकर चल रही थी। कई बड़े राजनेता यह मान रहे थे कि यह सीट या तो अनारक्षित होगी या फिर सामान्य महिला के लिए आरक्षित होगी।
इन राजनेताओं ने अपनी और अपनी पत्नी दोनो को ही चुनाव का संभावित प्रत्याशी बनाकर प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया था। कुछ नगर पंचायतों में भी यही स्थिति थी। सबकी नजर आरक्षण पर लगी थी। सोमवार को जब आरक्षण की घोषणा शासन ने की तो इन नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया।
लंबे समय से यह नेता चुनाव को लेकर तैयारी कर रहे थे। काफी पैसा भी खर्च कर रहे थे, लेकिन जब हाथरस नगर पालिका का अध्यक्ष पद एससी महिला के लिए आरक्षित हुआ तो यह नेता काफी मायूस दिखे।
हालांकि अभी यह इस पर आप त्ति दर्ज कराने की रणनीति तैयार कर रहे हैं, लेकिन इन्हें इन्हें इससे ज्यादा उम्मीद नहीं है। यह मानकर चल रहे हैं कि शासन द्वारा घोषित अनंतिम आरक्षण में फेरबदल नहीं होगा। वहीं कई राजनेता आरक्षण घोषित होने के बाद जोर-शोर से चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं।
भाजपा में सामने आ रहे नए दावेदार
हाथरस। आरक्षण की घोषणा होने के बाद सबसे ज्यादा सरगर्मी भाजपा के खेमे में देखी गई। हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष पद पर पिछले दस साल से भाजपा का कब्जा है। शासन ने जो आरक्षण घोषित किया है। उसके हिसाब से अब यह सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गई है। ऐसे में भाजपा में एकाएक चुनाव लड़ने के लिए नए दावेदार सामने आ गए हैं। अगले एक-दो दिन में इन दावेदारों की संख्या और ज्यादा बढ़ जाएगी। अन्य नगर पालिका व नगर पंचायतों में भी यही स्थिति है।