पोस्टमार्टम में निकलीं 0.32 बोर की दो गोलियां
अखिलेश के शव का पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार की देर रात हुआ। पोस्टमार्टम से पहले गोलियां ढूंढ़ने के लिए एक्स-रे कराया गया। चिकित्सकों को पोस्टमार्टम में 0.32 बोर की दो गोलियां मिली हैं। एक गोली बाएं हाथ व एक बायीं जांघ से निकाली गई है। शरीर पर सात जख्म के निशान हैं। इनमें चार गोलियां लगने के हैं। दो निशान गोलियां बाहर निकलने के हैं। एक सिर व एक बाएं हाथ में लगी गोली पार निकल गई, जो कि संभवत: 315 बोर की रही होगी। एक चेहरे पर गोली छूकर निकलने का निशान है।
आरोपी के पिता ने सात माह पहले अखिलेश के खिलाफ कराई थी रिपोर्ट
हत्याकांड के मुख्य आरोपी विक्रम उर्फ विक्की के पिता रमेशचंद्र ने 4 जुलाई 2025 में अखिलेश, उसके पिता देवेंद्र व रिश्तेदार श्यामवीर सिंह के खिलाफ मारपीट व जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि अखिलेश ने विक्रम के भाई बॉबी उर्फ विशाल को बेरहमी से पीटा था। इससे पहले 2024 व 2023 में भी अखिलेश के खिलाफ एफआइआर हुई थीं। पुलिस के अनुसार विक्रम की फुफेरी बहन से प्रेम विवाह करने के बाद से दोनों के बीच टशन बढ़ गई थी, जिसके बाद मुकदमेबाजी शुरू हुई।
अखिलेश की बहन डौली ने एफआइआर में सबसे पहला नाम रमेशचंद्र का ही लिखा है। इससे साफ है कि रमेश व उनके बेटों से ही अखिलेश की रंजिश चल रही थी। एफआइआर में रमेश ने बताया था कि उनका बेटा बॉबी शाम पांच बजे गांव में दूध लेने के लिए गांव महमूदपुर जाटान नगरिया जा रहा था। रास्ते में बंबा पटरी पर वहां देवेंद्र सिंह व उनके दो साथियों ने कार से बॉबी को टक्कर मार दी थी। जिससे उसके हाथ-पैरों में काफी चोट आई थी। आरोप था कि जब उसने भागने का प्रयास किया तो अखिलेश ने फायर किया, जिसमें वह बाल-बाल बचा। इसके बाद लोहे की रोड व डंडों से बेरहमी से पीटा। पुलिस के मुताबिक बॉबी गंभीर रूप से घायल हुआ था। कई जगह फ्रैक्चर आए थे। प्रकरण में अखिलेश को जेल काटनी पड़ी थी। लगभग दो महीने जेल में रहने के बाद 16 सितंबर 2025 को वह हाईकोर्ट से बेल कराकर बाहर आया था। इधर रिंकू सिंह द्वारा 2024 में दर्ज कराए जानलेवा हमले के मुकदमा में उसके गैर जमानती वारंट जारी हो गए थे, जिसे निरस्त कराने के लिए वह जमानत पर बाहर आने के बाद कोर्ट के समक्ष हाजिर भी हुआ था।
2023 में हुई थी मारपीट की रिपोर्ट दर्ज
अखिलेश के खिलाफ मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का पहला मुकदमा 6 मई 2023 में सादाबाद कोतवाली में दर्ज हुआ था। समदपुर के ही रहने वाले जितेंद्र उर्फ जीतू ने यह रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें उसका आरोप था कि अखिलेश व उसके साथी अनूप व विष्णु निवासी नगला गिरधारी कुरसंडा ने उसके भाई धर्मेंद्र से मारपीट की तथा उसे धमकाया। यह मुकदमा भी न्यायालय में विचाराधीन है।
विवाद के चलते शादी से कर दिया था इंकार
अखिलेश व उनकी पत्नी की शादी तीन साल पहले हुई थी। इससे पहले पांच साल दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे। गांव में बिलखते हुए पिता देवेंद्र सिंह ने बताया कि विवाद के चलते परिवार ने शादी से इंकार कर दिया था, लेकिन लडक़ी जिद पर थी। उन्होंने बताया कि लडक़ी ने विषाक्त खाकर जान देने की भी कोशिश की थी, जिसके बाद बेटे ने वर्ष 2022 में शादी कर ली थी। बस इसी के बाद से विक्रम ने टशन मान ली थी और मुकदमों का सिलसिला शुरू हो गया था।
बेटा होने के बाद हो गई थी सुलह
शादी के बाद अखिलेश व उनके परिवार से पत्नी के परिवारों ने कोई संबंध नहीं रखा था, लेकिन दो साल पहले बेटा रुद्र के होने पर मायके वाले राजी हो गए थे। दोनों परिवारों में आना-जाना हो गया था। घटना के बाद लडक़ी के माता-पिता मथुरा से गांव भी पहुंचे, लेकिन फिर भी विक्रम व उसके परिवार के लोग रंजिश माने हुए थे।
हत्या के बाद गांव जाकर ललकारा गया था अखिलेश के परिजनों को
तीन साल से चल रहे विवाद के बीच अखिलेश की हत्या में इलाक पुलिस की चूक सामने आ रही है। हैरानी की बात है कि लगातार मुकदमेबाजी व घेराबंदी के बाद भी पुलिस दोनों पक्षों की निगरानी नहीं कर रही थी। मुख्य आरोपी विक्रम पर गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई हो चुकी है। फिर भी पुलिस प्रकरण को हल्के में लेती रही। यही वजह है कि बेखौफ हमलावरों ने दिनदहाड़े घटना को अंजाम दिया और इसके बाद गांव में भी परिवार को ललकारा।
दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद हमलावर गांव पहुंचे। यहां घर पर केवल अखिलेश की मां संगीता थीं। पिता देवेंद्र ने बताया कि घर के बाहर आकर हमलावरों ने कहा कि उनका शेर कोल्ड के पास पड़ा है। उसे जान से मार दिया। अब किसी में हिम्मत है तो उसके पास जाकर दिखाए। उसका भी वही हाल होगा। परिवार के अन्य घरों के बाहर जाकर भी हथियार लहराए। इसके बाद चले गए। सनसनीखेज हत्याकांड के बाद भी हमलावरों को खौफ नहीं था। इसकी वजह परिजन पुलिस की निष्क्रियता बता रहे हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज पिता देवेंद्र ने बताया कि विक्रम के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मुकदमे हैं। पुलिस गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई कर चुकी है। इसके बाद भी आरोपियों की ओर से लगातार उनके बेटे पर मुकदमे दर्ज कराए जा रहे थे। जुलाई में दर्ज हुए मुकदमे में उनका भी नाम शामिल कर दिया था, जबकि वे व उनके रिश्तेदार तो यहां थे ही नहीं। लगातार मुकदमे व शिकायतों के सिलसिले के बाद भी बीट सिपाही से लेकर चौकी इंचार्ज व थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब कि पिता का कहना है कि मुख्य आरोपी विक्रम सिंह अन्य की क्षेत्र में दहशत थी। वे अन्य गैर कानूनी कार्यों में भी लिप्त थे।
सादाबाद कोतवाली में फिर कर दी थी शिकायत
अखिलेश 30 जनवरी को भी तारीख पर जिला न्यायालय तारीख पर आया था, लेकिन तीन आरोपियों में से एक हाजिर नहीं हुआ था। इस कारण वर्ष 2024 वाले जानलेवा हमले के मुकदमे में आरोप तय नहीं हो पाए थे और फिर 5 फरवरी की डेट लगा दी गई थी। चर्चाओं की मानें तो 30 जनवरी को ही सादाबाद कोतवाली में अखिलेश के खिलाफ फिर से शिकायत कर दी गई थी। इस संबंध में पुलिस ने फोन पर उससे संपर्क भी किया था। बृहस्पतिवार को न्यायालय परिसर में अखिलेश ने इस बात का जिक्र भी किया था, लेकिन पुलिस अपनी चूक छिपाने को चुप्पी साधे है।