न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक अब स्कूलों में शिक्षा की अलख जगाने के साथ पानी की एक-एक बूंद को सहेजने का पाठ भी बच्चों को पढ़ाएंगे, ताकि जल संरक्षण की मुहिम में बच्चे में भी सहभागी बन सकें। परिषदीय विद्यालयों में जल संरक्षण के लिए शासन जल संचयन प्रणाली लागू करने की योजना बना रहा है। इसके तहत बच्चों को जल संरक्षित करने के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।
शासन द्वारा परिषदीय विद्यालयों में वर्षा जल संचयन प्रणाली तैयार कराई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक वर्षा के जल को संरक्षित करते हुए भूगर्भ जल के स्तर को बढ़ाया जा सके। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय में पेयजल के लिए स्थापित किए गए जल स्रोत इंडिया टू मार्का हैंडपंप के नजदीक आवश्यकतानुसार सोख पिट भी बनाए जाएंगे, जिससे स्कूलों में जल निकासी और जलभराव की समस्या दूर हो सकेगी और भूगर्भ जल स्तर भी बढ़ेगा। शासन ने इसे लेकर पत्र जारी किया है। जल शक्ति अभियान के तहत भूगर्भ जल संरक्षण एवं कोविड 19 देशव्यापी महामारी के मद्देनजर यह कदम उठाया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्वच्छता और भूगर्भ जल संरक्षण संबंधी आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा सकेगा। जिले में करीब 1009 प्राथमिक, 456 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें लगभग सवा लाख बच्चे पंजीकृत हैं।
आने वाली पीढ़ी के लिए जल संरक्षण बहुत ही जरूरी है। इसके लिए आम जनमानस के साथ ही बच्चों को भी जागरूक किया जा रहा है। शासन के दिशा निर्देश के अनुसार परिषदीय विद्यालयों में भी इसके लिए काम कराया जाएगा।
- ऋचा गुप्ता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।