हाथरस के पॉवरलूम कारोबार के उत्पाद की अलग पहचान है, लेकिन आधुनिक समय में अब बाजार में तमाम ऐसे उत्पाद हैं, जिनका उत्पादन यहां मुमकिन नहीं है। ऐसे में यहां के कारोबारी अपने उत्पादों को बेचने के लिए पानीपत से आधुनिक उत्पादों को मंगाकर उनकी आपूर्ति करते हैं।
दूरदराज के प्रदेशों में होती है आपूर्ति
हाथरस के पॉवरलूम में बनने वाले उत्पादों की आपूर्ति सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि दूरदराज के प्रदेशों में भी की जाती है। इसमें गुजरात के साथ राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व उत्तराखंड शामिल हैं।
गलीचों की होती है विदेशों तक आपूर्ति
हाथरस की दो बड़ी यूनिटों में पॉवरलूम के जरिए गलीचे यानी कॉरपेट तैयार होते हैं। यहां तैयार होने वाले कॉरपेट दिल्ली की बड़ी फर्में खरीदती हैं और उन्हें कई अन्य देशों में बेचती हैं। इस तरह के महंगे उत्पाद बनाने वाली यूनिटें अब काफी कम हैं।
हाथरस की अधिकांश यूनिटों में धागा और कपड़ा बन रहा है। इसमें सर्दियों में ओढ़ने वाले खेस यानी मोटे धागे से बनने वाली चादरें व अन्य उत्पाद शामिल हैं।
कारोबार एक नजर में
- चार नामी मिलें थीं 1970 के दशक में
- 12 हजार से अधिक लोग करते थे काम
- 20 बड़ी यूनिट ही अब मौजूद हैं जनपद में
- 02 हजार के करीब लोग करते हैं कामकाज
- 60 करोड़ रुपये का सालाना का टर्नओवर
- 20 साल पहले तक छोटी बड़ी 250 यूनिटें थीं
- प्रोत्साहन न मिलने से 20 यूनिट ही हैं संचालित