सासनी में भाजपा की जीत का जश्न मनाते कार्यकर्ता
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डेढ़ दशक बाद भाजपा ने आखिरकार हाथरस में बसपा की बादशाह खत्म कर दी। 1996 से इस सीट पर लगातार बसपा का कब्जा था। परिसीमन से पहले लगातार यहां से तीन बार बसपा के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने जीत दर्ज की, जबकि परिसीमन में हाथरस सीट सुरक्षित होने के बाद विधायक गेंदालाल चौधरी ने यहां बसपा की जीत का क्रम जारी रखा, लेकिन पांचवीं बार मोदी लहर में बसपा का यह किला भी ढह गया। यही नहीं जिस सिकंदराराऊ सीट पर पिछली बार पूर्व मंत्री ने बसपा को जीत दिलाई थी, वह सीट भी बसपा से छिन गई। हालांकि इन दोनों ही जगहों पर बसपा दूसरे नंबर पर रही।
हालांकि गठन के बाद से भाजपा हाथरस विधानसभा सीट पर सिर्फ एक बार ही जीत सकी है। 1996 के चुनाव से यह विधानसभा सीट बसपा का अभेद्य गढ़ बन गई। भाजपा उसके मुकाबले लगातार पिछड़ती गई, लेकिन मोदी लहर के सहारे आखिरकार भाजपा ने बसपा के इस किले को भेद दिया। यही नहीं भाजपा ने सिकंदराराऊ विधानसभा सीट पर भी तमाम जातीय और राजनीतिक समीकरणों को धता बताते हुए जीत दर्ज की और बसपा से यह सीट भी छीन ली।
सादाबाद क्षेत्र में भले ही भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा हो, लेकिन यहां भी उसकी प्रत्याशी प्रीति चौधरी ने उम्मीद से अच्छा प्रदर्शन किया है। चुनाव नतीजों से साफ है कि भविष्य में विपक्षियों को जिले में भाजपा के खिलाफ नए सिरे से अपनी रणनीति तय करनी पड़ेगी।