स्वास्थ्य सिस्टम की संवेदनहीनता और अस्पतालों की कथित लापरवाही के कारण एक बार फिर एक गरीब परिवार की खुशियां उजड़ गईं। चंदपा के गांव कुंवरपुर की नौ साल की बच्ची की अलीगढ़ में उपचार न मिलने के कारण मौत हो गई थी। रविवार रात को बच्ची को जिला अस्पताल से रेफर किया गया था।
गांव कुंवरपुर के हरेंद्र कुमार मेहनत मजदूरी करते हैं। चार बेटियों में नौ वर्षीय प्रवेश सबसे बड़ी थी और कक्षा पांच की छात्रा थी। हरेंद्र ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उसे बुखार आ रहा था। 17 मई की सुबह पेट में दर्द व बुखार के चलते वे उसे जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे थे।
सुबह लगभग 10 बजे उपचार के बाद उसे राहत मिल गई थी। इस पर वे घर ले गए थे। शाम को फिर से पेट में दर्द उठा। वे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। दर्द बंद न होने पर प्रवेश को भर्ती कर लिया गया, लेकिन रात तक उसकी हालत में सुधार नहीं आया। रात लगभग 11 बजे उसे अलीगढ़ के लिए रेफर कर दिया गया था।
पिता ने बताया कि वे रात एक बजे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां इमरजेंसी में भर्ती तो कर लिया, लेकिन कुछ घंटे बाद आईसीयू वार्ड खाली न होने की बात कहकर बाहर निकाल दिया। हरेंद्र ने बताया कि उन्होंने काफी मिन्नत की, लेकिन आईसीयू बेड नहीं मिला। इस पर वे प्राइवेट अस्पताल रूसा लेकर पहुंचे, लेकिन वहां भी मना कर दिया। वे दिल्ली ले जा रहे थे कि रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
पिता ने रुंधे गले से कहा कि अगर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में उनकी बेटी को आईसीयू मिल जाता तो उनकी बेटी जिंदा होती। सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि स्थिति यहां नियंत्रण से बाहर थी, इसलिए हायर सेंटर रेफर किया गया था।