वित्तीय वर्ष 2022-23 के रिटर्न स्क्रूटनी के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिये जारी किए गए नोटिसों की अनदेखी करना व्यापारियों को भारी पड़ गया है। निर्धारित अंतिम तिथि 30 सितंबर तक संतोषजनक जवाब न देने पर वाणिज्य कर विभाग ने जिले के 514 कारोबारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
विभाग की कार्रवाई से व्यापारी वर्ग में खलबली मच गई है। जीएसटी पोर्टल पर वित्तीय वर्ष 2022-23 के वार्षिक रिटर्न (जीएसटीआर-9/9सी), मासिक रिटर्न (जीएसटीआर-3बी) और इनपुट टैक्स क्रेडिट (जीएसटीआर-2ए/2बी) के आंकड़ों का एआई आधारित आधुनिक टूल्स के माध्यम से स्वचालित मिलान किया गया था।
इस दौरान टर्नओवर छिपाने, कर देनदारी कम दिखाने और अनुचित रूप से अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने जैसी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके आधार पर जिले के कुल 1,078 पंजीकृत व्यवसायियों को स्क्रूटनी के तहत नोटिस फार्म जीएसटी एएसएमटी-10 जारी किए गए थे। विभाग द्वारा व्यापारियों को अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 30 सितंबर तक की समयसीमा निर्धारित की गई थी।
इस अवधि के भीतर जिले के 564 व्यवसायियों ने ही फार्म जीएसटी एएसएमटी-11 के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण दर्ज कराया अथवा स्वीकार्य कर जमा किया। वहीं 514 कारोबारियों ने तय तिथि बीत जाने के बाद भी कोई उत्तर नहीं दिया और न ही टैक्स जमा करने में रुचि दिखाई। इसे कर अपवंचन की श्रेणी में मानते हुए विभाग ने अब सीधे कारण बताओ नोटिस (डीआरसी-01) जारी करने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपयुक्त खंड-01 पीके गुप्ता ने बताया कारोबारियों को चाहिए कि वह समय रहते जारी नोटिस का जवाब दें।
जानिए क्या है नोटिस की पूरी प्रक्रिया और क्यों कसेगा शिकंजा?
-एएसएमटी-10 : विभाग सबसे पहले नियम 99 के तहत एआई के जरिये रिटर्न में मिलीं गड़बड़ियों की सूचना व्यापारी को देता है। यह कोई अंतिम मांग नहीं होती, बल्कि स्पष्टीकरण मांगने का अवसर होता है।
-डीआरसी-01 : यदि तय समय में व्यापारी जवाब नहीं देता या उसका जवाब असंतोषजनक होता है, तो धारा-73 के तहत औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी कर विधिक वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
-डीआरसी-07 : कारण बताओ नोटिस के बाद व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर मिलता है। इसके बाद भी कर का निस्तारण न होने पर विभाग टैक्स, भारी ब्याज और पेनाल्टी जोड़कर अंतिम रिकवरी ऑर्डर जारी कर बैंक खाते फ्रीज करने जैसी कार्रवाई कर सकता है।
टैक्स सलाहकारों के चक्कर काट रहे व्यापारी
30 सितंबर की डेडलाइन बीतते ही कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया शुरू होते ही संबंधित फर्मों के संचालकों में बेचैनी बढ़ गई है। व्यापारी अपने सीए और टैक्स अधिवक्ताओं के पास पहुंचकर पुराने खातों, ई-वे बिल और इनवॉयस का मिलान कराने में जुट गए हैं। कर विशेषज्ञ गिरीश कुमार शर्मा का कहना है कि अब व्यापारियों को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा, अन्यथा विभाग द्वारा एकपक्षीय असेसमेंट ऑर्डर पारित किए जाने पर भारी वित्तीय देनदारी का सामना करना पड़ सकता है।