पिछले सात साल से धूल फांक रहे सासनी के पराग डेयरी प्लांट को दोबारा चालू करने की कोशिश शुरू हो गई है। श्वेत क्रांति का सपना लेकर शुरू किए गए इस प्लांट पर सन 2008 में कर्जों के बोझ के चलते ताला लग गया था, लेकिन अब इसे बड़े स्तर पर चालू करने की योजना शासन स्तर से मंजूर हो चुकी है। दुग्ध उत्पादन के साथ यहां देसी घी उत्पादन की सूबे की सबसे बड़ी यूनिट लगाने की तैयारी है। शासन ने प्लांट के कायाकल्प के लिए साढ़े छह करोड़ रुपये भी मंजूर कर दिए हैं।
यह पैसा दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ को मिल गया है। अगले छह महीनों के भीतर यह योजना मूर्त रूप ले लेगी, जिसके बाद हाथरस ही नहीं, बल्कि पूरे मंडल के दुग्ध उत्पादकों के दिन फिर जाएंगे। खासकर हाथरस के किसान और पशुपालकों को अपना दूध खपाने के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। जिले में दुग्ध उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा इस प्लांट में आराम से खप जाएगा।
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साढ़े छह करोड़ से होंगे ये काम
साढ़े छह करोड़ के बजट से प्लांट की खंडहर हो चुकी बिल्डिंग का कायाकल्प किया जाएगा। इसकी मरम्मत कराई जाएगी। कुछ नए निर्माण होंगे। दूध की सेफ्टी के लिए रेफ्रीजरेशन, इलैक्ट्रिक और बॉयलर रूम बनेगा। प्लांट की साफ-सफाई होगी। मशीनरी की मरम्मत कराई जाएगी। इसे अपग्रेड किया जाएगा। सबसे खास यहां देसी घी उत्पादन की प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिट लगेगी, जहां से प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्यों में भी घी सप्लाई होगी।
हस्क फायर बॉयलर भी लगेगा
पहली बार प्लांट में हस्क फायर बॉयलर लगाया जाएगा, जोकि धान की भूसी से चलेगा। सबसे ज्यादा खर्च इसी पर होगा। अब तक बॉयल फर्नेश ऑयल से चलता है, जिससे उत्पादन पर ज्यादा खर्चा आता है।
2013 में मिले सात करोड़ से चुकाईं उधारी
हालांकि प्लांट को चालू करने की मुहिम 2012 में ही शुरू हो गई थी। चूंकि पराग डेयरी प्लांट अलीगढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अधीन है, इसलिए अलीगढ़ और हाथरस प्रशासन के प्रयासों से शासन ने इसे चालू कराने के लिए अप्रैल 2013 में करीब 7 करोड़ रुपये की ग्रांट दी, जिससे इसकी आधी उधारी चुका दी गईं। आधे कर्मियों के वेतन, किसानों का बकाया और बैंक लोन चुकता हो चुके हैं।
पूरे मंडल का दूध खपेगा यहां
जिले के लिए बड़ी उपलब्धि यह है कि एटा, कासगंज, अलीगढ़ और हाथरस जिले को मिलाकर एक दुग्ध संघ बनने जा रहा है। इन जिलों से संघ के जरिए आने वाला पूरा दूध पराग के सासनी प्लांट में ही खपाया जाएगा।
पराग की बदहाली पर एक नजर
- 2008 में लगा था प्लांट पर ताला
- 12.50 करोड़ की कुल देनदारी थी प्लांट पर
- 1.50 करोड़ करीब किसानों का था बकाया
- 80 लाख ट्रांसपोर्टरों का बकाया
- 12 लाख रुपये बिजली का बकाया
- 3.50 करोड़ करीब कर्मियों के वेतन का था बकाया
- 01 करोड़ रुपये मदर डेयरी दिल्ली का था बकाया
- 01 करोड़ रुपये बैंक लोन का था बकाया
- 07 करोड़ रुपया 2013 में मिला
- 6.50 करोड़ की देनदारी चुकाई प्रबंधन ने
- 7.41 करोड़ रुपया वर्तमान में प्लांट पर बकाया
6.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही प्लांट की जरूरतों का सर्वे किया जाएगा। उसके बाद यहां काम शुरू करा दिए जाएंगे। 6-7 महीने के भीतर प्लांट चालू करने की योजना है।
- एके पचौरी, जीएम पराग डेयरी अलीगढ़