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दादा ने बेटे-बेटी का भेदभाव भूलकर सिखाई कुश्ती 

Sat, 02 Sep 2017 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
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गीता फोगाट - फोटो : amar ujala
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ओलंपिक विजेता और फिल्म दंगल से चर्चा में आईं पहलवान गीता कुमारी फोगाट का कहना है कि कुश्ती का शौक उन्हें विरासत में मिला है। उनके दादा और पिताजी भी अच्छे पहलवान रहे हैं। उनके दादा ने लड़की और लड़के के बीच भेदभाव से परे हटकर उन्हें कुश्ती लड़ना सिखाया। उन्हें सही पहचान तो अंतर्राष्ट्रीय महिला पहलवान के रूप 2010 में ओलंपिक में कुश्ती जीतने के बाद मिली, लेकिन दंगल फिल्म में उनकी कहानी दिखाए जाने के बाद उनकी लोकप्रियता और बढ़ी है। गीता कुमारी अपने अंतर्राष्ट्रीय पहलवान पवन के साथ शुक्रवार को यहां बृज क्षेत्र के लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज में अखिल भारतीय कुश्ती दंगल में शिरकत करने आई थीं। 
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पत्रकारों से बातचीत में गीता ने कहा कि उन्होंने कुश्ती में कई मेडल जीते। उनकी शादी भी अंतर्राष्ट्रीय पहलवान पवन कुमार से हुई। उनके पति पहले केवल पुरुषों का अखाड़ा चलाते थे, लेकिन अब वह महिला पहलवानों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं। वह खुद भी अखाड़े में महिला पहलवानों को ट्रेनिंग दे रही हैं। गीता ने हरियाणा सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि अन्य प्रदेशों से खेलों के मामले में उनका राज्य काफी आगे है।
    उन्होंने कहा कि हालांकि उन्हें पुलिस में डीएसपी बनने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी, लेकिन आखिर में सरकार ने उन्हें डीएसपी बनाया। उन्होंने दंगल फिल्म में कोच को कमरे में बंद किए जाने की बात पर जवाब दिया कि रीयल लाइफ में ऐसा नहीं हुआ था, लेकिन मेरे परिजनों से मुझे नहीं मिलने दिया गया था। उन्हाेंने कहा कि हरियाणा सरकार की तरह अन्य प्रदेशों की सरकारों को भी खेलों को आगे बढ़ाने के लिए विद्यालयों में प्रतियोगिताओं का स्तर सुधारना चाहिए। उत्तर प्रदेश में विद्यालयों में खेल प्रतियोगिताएं नहीं हो रही हैं तो इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए, क्योंकि असली खिलाड़ी इसी स्तर से तैयार होते हैं। इस मौके पर उनके साथ उनके पति अंतर्राष्ट्रीय पवन पहलवान व दंगल अध्यक्ष अशीष शर्मा भी मौजूद थे।
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