होली के त्योहार पर मिठाइयों और नमकीनों में किस हद तक मिलावट की जाती है, इसकी तस्दीक खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े कर रहे हैं। पिछले वर्ष होली पर एफडीए ने खाद्य पदार्थों के 35 नमूने लिए थे। इनमें से 25 नमूने फेल आए हैं। अधिकांश नमूने खोवा, बेसन, सूजी और धनिया पाउडर के थे।
होली के त्योहार पर मिठाई, नमकीन और शीतल पेय पदार्थों की जमकर बिक्री होती है। त्योहार से पहले ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। कई खाद्य पदार्थों में नुकसानदायक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इन खाद्य पदार्थों के सेवन से लोगों के किडनी और लिवर खराब होने से लेकर कैंसर तक होने का खतरा है।
मिठाइयों, आइस्क्रीम, चॉकलेट और शीतल पेय पदार्थों से लेकर मसालों तक में नुकसानदायक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। यह रंग दो प्रकार के होते हैं। कोलतार (खाने योग्य) और प्राकृतिक (पेंट)। केवल कोलतार रंगों को ही खाने की वस्तुओं में मिलाने की अनुमति है। इसमें लाल, पीला, हरा और नीला रंग महत्वपूर्ण है।
यह दो प्रकार का होता है अम्लीय और क्षारीय। शेष सभी अम्लीय और क्षारीय रंगों के इस्तेमाल पर रोक है। हालांकि अब कोलतार रंगों में भी रसायन मिलाए जा रहे हैं। जैसे पिसी हुई लाल मिर्च में घुलनशील कोलतार रंग जैसे सूडान 293 की मिलावट की जाती है। इससे कूड़ा, कंकड़, बुरादा आदि को छुपाया जा सके।
त्योहार पर खप जाता है 180 हजार किलो खोवा
जिले में मिठाई की करीब 900 दुकानें हैं। इन पर करीब 45 हजार किलो खोवा रोजाना बनता है। त्योहारों पर खोवा की खपत चार गुनी हो जाती है। इस हिसाब से 180 हजार किलो खोवा की खपत हो जाती है। इसकी पूर्ति होना संभव नहीं है। इससे मिलावट का बाजार जोर पकड़ लेता है।
वर्जन-
मिलावटखोरी पर लगाम कसने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग अभियान चला रहा है। होली पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। मिलावटखोरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- रणधीर सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य।