हाथरस। जिलाधिकारी डॉ. रमाशंकर मौर्य के आदेश पर शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) की पहली लिस्ट में 101 प्राइवेट स्कूलों में दिए गए 744 विद्यार्थियों के एडमीशन की समीक्षा के लिए बीएसए रेखा सुमन ने सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रबंधकों के साथ शुक्रवार को मीटिंग की।
बीएसए ने सभी को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि जो विद्यालय संचालक जारी सूची में शामिल निर्बल और गरीब विद्यार्थियों को एडमीशन नहीं देंगे, उनके विद्यालय के खिलाफ जिलाधिकारी के माध्यम से आरटीई 2009 के उल्लंघन के आरोप में मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
सरकार ने इस बार शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को जिले में कड़ाई से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति ने पहली सूची में 744 विद्यार्थियों को 101 प्राइवेट सीबीएसई व बेसिक शिक्षा परिषद के मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में एडमीशन देने के लिए इनकी सूची जारी कर दी है, लेकिन अभिभावकों के इन विद्यालयों में पहुंचने के बाद विद्यालय संचालक इन निर्बल वर्ग के विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए तैयार नहीं हैं।
इनके द्वारा इसमें तरह-तरह की खामियां निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। आरटीई 2009 के संशोधित अधिनियम 2018 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जा चुका है कि प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम करेंगे। इन गरीब बच्चों को विद्यालयों के उपलब्ध सभी प्रकार के संसाधनों का समान रूप से उपभोग का अधिकार भी इस अधिनियम में दिया गया है।
बैठक में एनजीओ प्रयास संभव के प्रतिनिधि के रूप में विद्वान अधिवक्ता सतीश सोलंकी ने कानून के सभी पहलुओं के बारे में सभी विद्यालय संचालकों को जानकारी दी। बीएसए के साथ एबीएसए जमुना प्रसाद सुमन, एबीएसए भुवनेश चौधरी, पटल सहायक गजेंद्र कुमार, एबीआरसी कृष्ण गोपाल, उमेश सारस्वत सहित सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक मौजूद थे।