पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में साइबर सेल फर्जी डिजिटल पहचान बनाने वालों पर भी पैनी नजर रख रही है। जांच के दौरान ठगी और भ्रामक प्रचार में संलिप्त पाए गए 423 फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट को ब्लॉक कराया गया है। पुलिस का मानना है कि इन एकाउंट को बंद करने से भविष्य में होने वाली कई बड़ी वारदातों पर अंकुश लगेगा।
एक साल में दर्ज हुई 55 रिपोर्ट, जांच जारी
वर्ष 2025 में साइबर थाने और सेल में कुल 55 रिपोर्ट दर्ज कराईं गईं हैं। इनमें से 42 रिपोर्ट गंभीर धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी की धाराओं में दर्ज हैं। इनमें अधिकतर घटनाओं का पर्दाफाश हो चुका है। जो रह गई हैं, उनमें साइबर विशेषज्ञों की टीम बैंक ट्रांजेक्शन और आईपी एड्रेस के जरिये आरोपियों की लोकेशन ट्रेस कर रही हैं ताकि गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
जरूरी सावधानी
- गोल्डन ऑवर : ठगी के बाद के 2 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। तुरंत सूचना देने पर पैसा बैंक में ही रुकने की संभावना 90 फीसदी तक होती है।
- सत्यापन : किसी भी कंपनी में पैसा लगाने या नौकरी ज्वाइन करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट और पते की जांच स्वयं करें।
- साझा न करें : अपना पासवर्ड, ओटीपी या बैंक पिन कभी किसी को न बताएं।