अदालत में यह मामला झूठा पाया गया और आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। उधर, भानू प्रताप व पोप सिंह ने थाना मिरहची में महिला व उसकी पुत्री के अलावा रानू, संजीव सहित छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि रानू और संजीव ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सहायक शिक्षक की नौकरी प्राप्त कर ली थी। सत्यापन में दस्तावेज फर्जी मिलने पर दोनों को बर्खास्त कर हाथरस के सासनी गेट थाने में फर्जीवाड़े की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।
इससे बौखलाकर दोनों ने रंजिशन अपने घर में काम करने वाली महिला व उसकी पुत्री को लालच देकर बीएसए व बीईओ पर झूठा केस दर्ज कराया। इन लोगों पर चौथ वसूली, सामाजिक व विभागीय ख्याति को धूमिल करने आदि के भी आरोप लगाए गए। हालांकि अदालत में वादी इन आरोपों से मुकर गए लेकिन झूठा केस दर्ज कराने के मामले में महिला दोषी पाई गई। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विकास गुप्ता ने उसे चार माह के कारावास की सजा सुनाई और 5000 रुपये अर्थदंड लगाया।