दिवाली पर लोग धन-संपदा की कामना के साथ मां लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। इसलिए माता लक्ष्मी की सवारी उल्लू की पूजा कर तंत्र क्रियाएं पूरी की जाती हैं। वन विभाग ने इसको ध्यान में रखते हुए उल्लुओं का शिकार रोकने की तैयारी की है। हाथरस की सासनी तहसील के सुसायत कलां क्षेत्र में उल्लू पाए जाते हैं। यहां पर रविवार और सोमवार की रात विभागीय टीम यहां पर निगरानी करेगी।
दिवाली की रात तंत्र विद्या को साकार करने का पूजा पाठ होता है। इस दौरान टोने-टोटके, तंत्र विद्या, सिद्ध विद्या की क्रियाएं की जाती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उल्लू मां लक्ष्मी के वाहन के रूप में समृद्धि एवं सौभाग्य सूचक होता है। इसलिए दिवाली के दौरान इनके शिकार व व्यापार की घटनाएं सामने आती हैं। इसको रोकने के लिए हर साल वन विभाग सक्रिय होता है। इस साल भी वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। वन अधिकारियों ने निर्देश जारी किए हैं कि उल्लू के शिकार व व्यापार की घटना पर विशेष निगाह रखी जाएगी।
गौर हो कि इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने वन उल्लू और मोटल्ड वुड उल्लू को लुप्तप्राय श्रेणी में सूचीबद्ध किया है। वन अधिकारियों ने आम जन से भी अपील की है कि अगर कहीं इस तरह का कोई क्रिया-कलाप होता दिखे तो पुलिस, वन अधिकारी या सक्रिय एनजीओ को सूचित करें।
सुसायत कलां स्थित वनक्षेत्र व अन्य जगहों पर उल्लुओं का शिकार रोकने के विशेष निर्देश जारी किये गए हैं। इसके लिए रात के समय गश्त बढ़ाई गई। कर्मचारियों को तैनात किया गया है। उल्लुओं के शिकार की छोटी सूचना को भी गंभीरता से लिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।-राकेश चंद्र यादव, प्रभागीय वनाधिकारी हाथरस।
सुसायत कलां पर विशेष फोकस
सासनी के वन क्षेत्र सुसायत कलां में वर्तमान में उल्लू मौजूद हैं। पिछले समय यह इलाका उल्लुओं के शिकारियों की सक्रियता के लिए जाना गया है। ऐसे में सुसायत कलां क्षेत्र में वन विभाग की ओर से विशेष सतर्कता बरती जा रही है।