नगर पंचायत के चुनाव में इस बार कई इतिहास लिखे गए हैं। 164 वर्ष पुरानी नगर पंचायत में पहली बार जनता ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में राजनीतिक दल का अध्यक्ष चुना है।
नगर पंचायत का पहला चुनाव वर्ष 1919 में हाथ उठाकर हुआ था। इसमें जनता ने नगर के सेठ चंदनबाबू को चेयरमैन बनाया था। इसके बाद वर्ष 2012 से कस्बे में चले आ रहे इस मिथक को भी तोड़ा कि कस्बा में केवल एक ही बार एक परिवार से एक व्यक्ति चेयरमैन बना है। वर्ष 2012 में भगवती प्रसाद दिवाकर चेयरमैन बने।
उससे पहले उनकी पत्नी चंद्रवती दिवाकर वर्ष 2000 में चेयरमैन चुनी गईं। इस बार भी इसी परिवार से पूर्व चेयरमैन भगवती प्रसाद दिवाकर की पुत्रवधू शीला देवी ने नगर पंचायत की चेयरमैन बनी हैं। शीला देवी भाजपा की प्रत्याशी थीं। नगर पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। सीमा विस्तार होने के बाद सभी को ऐसा लगने लगा था कि इस बार अनुसूचित जाति में किसी विशेष जाति का दबदबा रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी तरह नगर पंचायत में ब्राह्मण जाति का कोई सदस्य भी चुनकर नहीं पहुंचा है। संवाद