हाथरस में निराश्रित गोवंश की समस्या नासूर बनी हुई है। जिला प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद निराश्रित गोवंश किसानों की फसल के साथ साथ आम जन की जान के दुश्मन बने हैं। जिला प्रशासन की ओर से कराए गए गोशालाओं के सत्यापन में भी कई खामियां सामने आई हैं। इनको दूर करने के लिए जिलाधिकारी अर्चना वर्मा ने संबंधित खंड विकास अधिकारियों व नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
जिले में निराश्रित गोवंश की समस्या थमने का नाम नहीं ले रही है। शासन की ओर से निराश्रित गोवंश को अस्थायी और स्थानीय गोशालाओं में रखने के लिए 31 मार्च तक की समय सीमा निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद जिले में निराश्रित गोवंश खुले में विचरण कर रहे हैं। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए रात को खेतों पर पहरा दे रहे हैं, जिससे गोवंश उनकी फसल को बर्बाद न कर सकें।
हैरानी की बात यह है कि पिछले दिनों जिला स्तरीय अधिकरियों से जिले संचालित अस्थायी और स्थायी गोशालाओं का सत्यापन कराया गया था। इस दौरान कई खामियां सामने आईं। जिले की ज्यादातर गोशालाओं में गर्मी के मौसम में टिन शेड न होने की रिपोर्ट अधिकारियों ने दी है। गांव नगला ब्राह्मण में सत्यापन के दौरान सामने आया कि यहां मृत गोवंश के शवों को दफनाने की व्यवस्था नहीं है।