आखिरी कुश्ती के दौरान हंगामा होने पर मची अफरा-तफरी।
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मेला श्री दाऊजी महाराज में आयोजित अखिल भारतीय कुश्ती दंगल के समापन पर आखिरी कुश्ती 11 लाख रुपये की नहीं, एक लाख रुपये की हुई थी। कुश्ती बराबर छूटी तो दोनों पहलवानों को 50-50 हजार रुपये दे दिए गए थे। दंगल में आखिरी कुश्ती कहां-कहां के कौन-कौन पहलवान लड़ेंगे यह भी दंगल कमेटी ने पहले से ही तय कर लिया था।
दंगल कमेटी ने जनता को दिखाने के लिए माइक से यह बताया गया कि 11 लाख की आखिरी कुश्ती सोनीपत के जुगेंद्र पहलवान और दिल्ली के कृष्णा के बीच होगी। यह कुश्ती हुई और बराबरी पर छूटी। दंगल का नियम है कि यदि कुश्ती बराबरी पर छूटती है तो दोनों पहलवानों को 70 फीसदी धनराशि बराबर-बराबर दी जाती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
दोनों पहलवानों को 50-50 हजार देकर रवाना कर दिया गया। यह सभी आरोप दंगल के सह संयोजक उदयवीर पहलवान मई सादाबाद वाले ने लगाए हैं। उनका आरोप था कि दंगल में जितनी भी बड़ी कुश्तियां लाखों में हुई हैं, वह सभी पहले से ही फिक्स कर दी जाती थीं। इसका उन्हाेंने विरोध भी किया, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। वह जब आखिरी कुश्ती के लिए ब्रज केसरी देवेंद्र पहलवान मथुरा को कुश्ती लड़ने के लिए जब जुगेंद्र से हाथ मिलवाने पहुंचे तो उनके साथ अभद्रता की गई और कुश्ती नहीं लड़ने दी गई।
सादाबाद के हरकेश पहलवान जिन्होंने कुश्ती में जुगेंद्र को कई बार चित किया है उन्हें दंगल के दौरान एक भी कुश्ती नहीं लड़ने दी गई। दंगल में बड़ी कुश्तियों के नाम पर कोरी नाटकबाजी हुई है। पूरे दंगल में फिक्सिंग हुई है।
दंगल के आखिरी दिन दंगल कमेटी के ही कई पहलवान कुश्ती लड़ने के लिए अखाड़े में पहुंच गए। इन पहलवानों की कुश्ती अखाड़े में ज्यादा देर तक नहीं चली और वह कुश्ती भी आसानी से जीत गए। लोगों में यह बात चर्चा का विषय बनी रही। दंगल के आखिरी समय तक कई बार अखाड़े में हंगामा हुआ।
दंगल के अखाड़े से सादाबाद के सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल ने कहा कि इस बार उन्होंने जिला प्रशासन से बिना पैसे लिए निजी खर्च से दंगल कराया है। उत्तेजित होकर यहां से उन्होंने विपक्षी नेताओं को अपशब्द बोले।