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Hathras News: दहेज हत्या में पति सहित पांच को 10 साल कैद की सजा

Fri, 28 Jul 2023 12:44 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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विशेष न्यायाधीश (एससी /एसटी एक्ट) राम प्रताप सिंह के न्यायालय ने दहेज हत्या के मामले में पति सहित पांच लोगों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार शहर के कोतवाली सदर क्षेत्र के गांव अहियापुर खुर्द निवासी चंद्रप्रकाश पुत्र प्रताप सिंह ने मुरसान थाने में तहरीर दी थी। तहरीर में उन्होंने कहा था कि उसकी बहन बबीता की शादी 17 मई 2019 को मंगल सिंह पुत्र इंद्रपाल सिंह निवासी मोहल्ला छिपैटी मुरसान जिला हाथरस के साथ हुई थी। शादी में लगभग पांच लाख रुपये खर्च किए थे।



उसकी बहन के ससुर इंद्रपाल सिंह, सास ज्ञान देवी पति मंगल सिंह, देवर करुआ और कृष्णा और उसकी ननदें शादी में दिए गए दान-दहेज से खुश नहीं थे। शादी के बाद से ही बबीता से दो लाख रुपये और सोने के गहने दहेज में पिता से लेकर आने की कहते थे और पीटते थे। दहेज में और पैसे लिए बिना घर में कदम रखने से मना करते थे।
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भाई ने कहा है कि उसकी बहन जब भी उसके घर अहियापुर खुर्द आती थी। तब यह सब बात उसे बताती थी। उसने कई बार अपने रिश्तेदारों को लेकर अपनी बहन के ससुराल वालों को समझाया, लेकिन वह नहीं माने। 24 अक्तूबर 2019 को मंगल सिंह बबीता को साक्षी के घर पर छोड़ गए। 18 नवंबर 2019 को मंगल सिंह और कृष्णा उसके घर आए और दो लाख रुपये व गहनों की मांग की। उसने समझाकर बबीता को मंगल के साथ भेज दिया। 26 नवंबर 2019 को दिन के करीब दो बजे इन सभी लोगों ने मिलकर उसकी बहन बबीता की हत्या कर दी। सूचना पाकर वह और उसके परिवार वाले मोहल्ला छिपैटी मुरसान पहुंचे। यह सब लोग उसकी बहन की लाश को बरामदे में छोड़कर भाग गए।




इस मामले में थाना मुरसान में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना करते हुए अभियुक्त मंगल सिंह, इंद्रपाल, गंगा प्रसाद उर्फ करुआ, कृष्णा व ज्ञान देवी के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट रामप्रताप सिंह के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत अभियुक्त मंगल सिंह, इंद्रपाल सिंह, गंगा प्रसाद उर्फ करुआ, ज्ञान देवी व कृष्णा को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी प्रतिभा सिंह राजपूत ने की।
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