मणिपुर में महिलाओं, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार को रोकने में केंद्र की भाजपा सरकार पर विफलता आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय लोकदल कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया और प्रभारी अधिकारी को राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मणिपुर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई।
वक्ताओं ने कहा कि मणिपुर सरकार हिंसा को रोकने में नाकाम रही है। ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का हक नहीं। इस सरकार को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और वहां राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए। प्रदर्शन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष केशव चौधरी व सादाबाद विधायक गुड्डू चौधरी ने किया। वक्ताओं ने कहा कि मणिपुर तीन महीने से नफरत की आग में जल रहा है।
महिलाओं के साथ हुई बर्बरता से पूरा देश शर्मसार हुआ है। महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पूरा देश एकजुट है, लेकिन प्रधानमंत्री एक शब्द नहीं बोल रहे हैं। लोकसभा या राज्य सभा सांसद चर्चा करना चाहते हैं, तो उन्हें पूरे सत्र के लिए संसद से बर्खास्त कर दिया गया। यह सरकार की तानाशाही है। उन्होंने सांसदों का निलंबन वापस लेने की मांग भी उठाई।
उन्होंने कहा कि मणिपुर के पहाड़ी इलाके में खनिज पदार्थ होने की वजह से बड़े-बड़े औद्योगिक घराने वहां जड़ें जमाना चाहते हैं। यदि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समय पर कार्रवाई करते तो मणिपुर के यह हालात इतने गंभीर नहीं होते।
ज्ञापन देने वालों में पूर्व विधायक प्रताप चौधरी, उम्मेद सिंह, धर्मवीर सिंह चौहान, महेंद्र सिंह धनगर, दीवान सिंह जूरैल, युवा अध्यक्ष महिपाल सिंह, युवा रालोद नेता दीपू चौधरी, रामसहाय, सुभाष सिंह, रमेश सिंह, बहादुर सिंह एडवोकेट, सचिन पचहरा, भूरा पहलवान, सूरजपाल सिंह, बिट्टू राना, इरफान मलिक, बनी सिंह पहलवान, कर्मवीर सिंह, बनी सिंह पहलवान, सतेंद्र फौजदार, प्रमोद, प्रज्ज्वल गौतम, रामबीर सिंह प्रधान आदि अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।