सादाबाद के पूर्व विधायक चौ. बृजेंद्र सिंह का कहना है कि प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण से वातावरण दूषित हो रहा है, ठीक उसी प्रकार अब राजनीति भी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। अब जनबल से नहीं, बल्कि धनबल से चुनाव जीते जाते हैं।
पूर्व विधायक बृजेंद्र सिंह का कहना है कि पहले राजनीतिक दल कार्यकर्ता के चरित्र, लोकप्रियता एवं कार्यक्षमता को देखकर टिकट दिया करते थे, लेकिन अब बाहुबल और धनबल के कारण दल-बदल करने वाले एवं सामाजिक क्षेत्र में काम नहीं करने वाले लोग भी टिकट पा जाते हैं, जिससे राजनीति का निरंतर क्षरण हो रहा है।
उन्होंने बताया कि उनको 1991 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस आधार पर प्रत्याशी बनाया गया था कि उन्होंने जनसंघ के प्रचारक के रूप में क्षेत्र में बचपन से लेकर काम किया और आपातकाल के दौरान 17 माह तक जेल भी काटी। भारतीय जनसंघ के कई वर्षों तक वह मथुरा के जिला महामंत्री भी रहे। गौरक्षा सत्याग्रह के चलते एक माह का उन्हें कारावास भी भुगतना पड़ा।
पूर्व विधायक ने बताया कि जब उनको 1991 में प्रत्याशी बनाया गया था, तब उनके पास कोई बैंक बैलेंस नही था। टिकट मिलने पर खुद पार्टी, संघ के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने अपने-अपने वाहनों और साइकिलों के माध्यम से गांव-गांव जाकर प्रचार किया।
इसमे एक प्रमुख कारण यह भी था कि सादाबाद से दो बार लोकदल की टिकट पर चुनाव जीते कुं. छाबी मियां तीसरी बार भी उनके सामने मैदान में थे। चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु हो गई थी। इस कारण चुनाव की अवधि एक माह आगे खिसका दी गई थी और उनके प्रतिद्वंद्वी ने मेरा खेत और मकान बिकवाने की बात कही थी।
कार्यकर्ताओं को जब यह मालूम हुआ तो कार्यकर्ताओं ने रात-दिन एक कर मुझे साढे़ पांच हजार मतों से विजयी बनाने मे अपनी महती भूमिका अदा की थी और कार्यकर्ताआें की इस मेहनत के दम पर ही उन्हें सादाबाद क्षेत्र का विधायक बनने का गौरव प्राप्त हुआ।