भीषण हादसे को लेकर इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालक भड़क गए, उनका कहना था कि हम लोग टोल के साथ-साथ रोड टैक्स आदि जमा कर रहे है। उसके बावजूद भी हादसे के दो घंटे बाद भी टोल प्लाजा की तरफ से न कोई एंबुलेंस आई और न ही रास्ते से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए कोई भी मशीन भेजी गई। वह लगातार टोल प्लाजा पर फोन करते रहे, पुलिस के भी कई बार फोन करने के दो घंटे बाद हाइड्रा मौके पर पहुंची। कुछ ड्राइवर टोल कर्मियों से भी उलझने लगे। पुलिस ने उन्हें समझाया। वाहन चालकों का कहना था कि कड़ाके की ठंड में सही समय से मदद न मिलने पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पिता के मना करने के बाद भी बना ड्राइवर
हादसे में मृतक धर्मेंद्र के पिता ओमप्रकाश अन्य परिजनों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और गाड़ी की स्थिति को देखकर बुरी तरह बिलखने लगे। उनके साथ आए अन्य लोग उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे थे। रोते हुए उन्होंने बताया कि पुत्र को गाड़ी पर ड्राइवरी करने के लिए मना किया था कि कोई दूसरा काम देख ले, लेकिन वह नहीं माना। मृतक धर्मेंद्र ने अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ा है, जिसमें से एक बच्चा 6 माह पहले ही हुआ था। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था।