बच्चों के साथ रजिस्ट्री दफ्तर पर पहुंची मीता देवी।
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कस्बे के मोहल्ला नौरंगाबाद निवासी दलित विधवा मीता देवी के जेहन में अपनी जमीन जाने का खौफ इस कदर घर कर गया है कि वह रोज यह देखने के लिए तहसील के रजिस्ट्री दफ्तर पर पहुंच रही हैं। उन्हें डर है कि कहीं दबंग उनके मकान का बैनामा नहीं करा लें। वह सुबह से शाम तक यहां बैठती हैं और दफ्तर बंद होने के बाद ही यहां से जाती हैं। मीता देवी का कहना है कि पति ने 14 वर्ष पूर्व प्लॉट लेकर यह मकान बनाया था। अब पति की मौत के बाद उसी जगह का दोबारा बैनामा करने की दबंगों ने पूरी तैयारी कर ली है।
14 वर्ष पहले मोहल्ला निवासी दलित धर्मवीर सिंह ने एक प्लॉट उचित कीमत देकर खरीदा था। उस समय खरीदी गई जमीन का बैनामा हो गया था। इसके पीछे कारण था कि स्टांप ड्यूटी ज्यादा थी। अक्सर इस तरह के नोटरी बैनामे होते थे। इसके बाद धर्मवीर ने मजदूरी करके प्लॉट पर छोटा सा घर बना लिया था। कुछ समय पूर्व मीता देवी के पति की मौत हो गई। मीता देवी की मानें तो पति की मौत के बाद जिस शख्स ने धर्मवीर को प्लॉट बेचा था, उसकी नीयत में खोट आ गया। उसने उसी जमीन को पुन: बेचने का मन बनाकर खरीदार भी तलाश लिया। जब यह बात मीता देवी को पता चली तो उनके होश उड़ गए।
दो बच्चों के साथ मजदूरी करके वह अपना गुजारा तो कर लेगी, लेकिन जब मकान नहीं रहेगा तो बच्चों के साथ कहां रहेगी। उसके मकान के कागज तैयार हैं। केवल बैनामा होने की देर है। लगातार 14 दिन से वह बच्चों के साथ रजिस्ट्री दफ्तर के बाहर आकर बैठ जाती है और दफ्तर बंद होने के बाद घर लौटती है। उसके इस प्रयास से मकान की रजिस्ट्री नही हो रही है। इसी वजह से दोबारा मकान बेचने वाले की हिम्मत उसके सामने आने की नही हो रही है। सवाल खड़ा होता है कि अगर जमीन का बिक्री गैरकानूनी थी तो 14 साल से कुछ क्यों नहीं किया गया। पति की मौत के बाद ही जमीन को दोबारा बेचने का प्रयास क्यों किया जा रहा है।