व्यापारियों और किसानों के अनुसार इस समय शीतगृहों से 3797 प्रजाति का आलू 550 से 650 प्रति पैकेट (40किलोग्राम) तक बिक रहा है, जबकि पिछले साल यह 1300 से 1400 रुपये प्रति पैकेट बिका था। हाइब्रिड आलू इस बार 300 से 500 तक बिक रहा है, जबकि पिछले साल यही आलू 1100 से 1200 रुपये प्रति पैकेट तक बिक गया था।
बढ़ रही लागत, मुनाफा हो रहा कम
किसानों का कहना है कि मौजूदा भाव में किसानों को घाटा हो रहा है। इसलिए शीतगृह से नहीं निकाल रहे। अगस्त माह में भाव बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। लोकेरा निवासी किसान दीपू चौधरी बताते हैं कि एक बीघा खेत में 50 पैकेट आलू हुआ। इसमें करीब 25 हजार रुपये की लागत आई। 130 रुपये कोल्ड स्टोरेज भाड़ा, 32 रुपये का बारदाना और 12 रुपये प्रति पैकेट शीतगृह तक पहुंचाने में खर्च हो गए। भाव 400 रुपये प्रति पैकेट मिलने से घाटा है। हाथरस के गांव टीकैत अरौठा निवासी मनोज कुमार का कहना है कि एक बीघा खेत में करीब 45 से 50 पैकेट आलू पैदा होता हैं। इसमें 30 से 35 पैकेट मोटे आलू के होते हैं, जिसका भाव 500 रुपये तक चल रहा है। 15-20 पैकेट गुल्ला होता है, जिसका भाव 300 रुपये है। पांच पैकेट किर्री (छोटा आलू) के निकलते हैं, जिसका भाव 150 रुपये प्रति पैकेट रहता है।
कारोबारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश के आलू का बाजार सिकुड़ रहा है। पंजाब, गुजरात और पश्चिमी बंगाल के आलू ने यूपी के आलू की खपत कम कर दी है। पहले यहां से छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान और हरियाणा में आलू जाता था, लेकिन अब वहां पंजाब का आलू छाया हुआ है। बंगाल ने भी अपना आलू भेजना शुरू कर दिया है। गुजरात में भी अपनी आलू की फसल होने लगी है। इन कारणों से यूपी के आलू की मांग कम हुई है।
मंडल में आलू की खेती पर एक नजर
| जिला |
रक्बा हेक्टेयर में |
भंडारण मीट्रिक टन में |
निकासी |
| हाथरस |
52,000 |
12,00,000 |
4,00,000 |
| अलीगढ़ |
36,000 |
1,25,000 |
36,000 |