मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंगलवार को होने वाले दौरे और सभा से पहले रविवार को कार्यक्रम स्थल से करीब 500 मीटर की दूरी पर धरना देकर बैठ गए। ये सलेमपुर क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे थे। इनका आरोप था कि जबरन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, जबकि वह अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं। बाद में एसडीएम से वार्ता के बाद उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।
रविवार सुबह सलेमपुर में होने वाले मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल से महज 500 मीटर की दूरी पर चार गांवों छौंक, बहटा, लक्षिमपुर और दौलतपुर के सैकड़ों किसान तिरपाल बिछाकर धरने पर बैठ गए। किसानों का आरोप है कि यूपीसीडा द्वारा उनकी 500 एकड़ उपजाऊ भूमि का जबरन अधिग्रहण करने का प्रयास किया जा रहा है। लेखपाल सहमति पत्र भरवाने पहुंचे, तो ग्रामीण आक्रोशित हो गए। किसानों का कहना है कि उन्होंने मौके पर विरोध दर्ज कराया, लेकिन जब प्रशासनिक कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं सुनी।
किसानों का कहना है कि यह उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि अधिग्रहण को लेकर न तो कोई गजट जारी हुआ और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई नोटिस दिया गया। लेखपाल आकर जबरन सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बना रहे हैं। अगर हमारी उपजाऊ जमीन ही छीन ली जाएगी, तो हमारे परिवार क्या खाएंगे? किसानों ने मांग रखी है कि यदि उनकी जमीन ली भी जाती है, तो पहले उचित मुआवजा तय किया जाए, सर्किल रेट बढ़ाया जाए और प्रभावित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
मुख्यमंत्री की सभा के पास किसानों के इस अचानक प्रदर्शन से पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही हाथरस जंक्शन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और किसानों को समझाने का प्रयास किया। लगभग पांच घंटे तक चले गतिरोध के बाद, पुलिस ने एसडीएम सासनी नीरज कुमार शर्मा से किसानों की फोन पर बात कराई। एसडीएम ने फोन पर सभी प्रदर्शनकारी किसानों को पूरी तरह आश्वस्त किया कि फिलहाल किसी भी प्रकार का जबरन अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है और किसानों की स्पष्ट सहमति व अनुमति के बिना उनकी एक इंच जमीन भी नहीं ली जाएगी।
इस ठोस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त किया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो वे आगे बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
इनका कहना है
किसानों को समझाया गया है। फिलहाल सलमेपुर पर कोई जमीन अधिग्रहित नहीं की जा रही है। उनकी अनुमति के बिना जमीन नहीं ली जाएगी।
नीरज शर्मा, एसडीएम सासनी