बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कराई जा रही फर्जी बीएड शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच में कुछ नई चीजें सामने आई। इसमें देखा जा रहा है कि एक-एक फर्जी बीएड की डिग्री पर दो-दो लोगों ने नौकरी की है। यह देखकर जांच करने वाले अधिकारी भी चौंक गए हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के शिक्षा सत्र 2004-05 में बीएड की डिग्री विश्वविद्यालय से तो बिना पढ़े लोगों के पास पहुंची ही, साथ ही कुछ लोगों ने विश्वविद्यालय की इन अव्यवस्थाओं का अपने तरीके से खुलकर लाभ उठाया है। देखा यह जा रहा है कि विश्वविद्यालय की एक असली डिग्री को कूटरचित तरीके से तैयार कर दो-दो लोगों ने विभाग में नौकरी हासिल कर ली। इनमें से कुछ शिक्षकों ने कई साल तक विभाग में नौकरी भी की। इसके बाद विभाग से जब जांच शुरू हुई तो बड़ी ही होशियारी से विभाग में शिक्षक के पद से अपना त्यागपत्र स्वीकृत भी करा लिया। कुछ ने लंबे समय तक विभाग से वेतन पा लिया औरफिर ड्यूटी से गायब हो गए। इस कारण विभाग ने खुद ही मजबूरी में उनको नोटिस दिए। इन नोटिस का कोई जवाब नहीं आने पर विभाग को उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई करनी पड़ी।
अब देखना यह है कि विभाग द्वारा सेवा समाप्त किए जाने एवं विभाग से इस्तीफा देने वाले ऐसे शिक्षकों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, क्योंकि इन लोगों ने अपनी 5 से 10 साल की नौकरी में लाखों के सरकारी धन का गबन किया और बड़ी ही चतुराई से खुद को बचा लिया है। वैसे भी विभाग पहले चरण में सिर्फ विभाग में मौजूदा समय में तैनात शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का ही सत्यापन करा रहा है, लेकिन ऐसे लोगों के बारे में जांच द्वितीय चरण में ही होगी तो विभाग में नौकरी करने के बाद इस्तीफा देकर या फिर लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बाद विभाग से अपनी सेवा समाप्त करा चुके हैं।