लगातार हुई बारिश ने गेहूं की फसल पर इस बार प्रतिकूल असर डाला है। नमी अधिक होने के कारण सरकारी खरीद केंद्रों पर भी एमएसपी पर खरीद नहीं हो पा रही है। ऐसे में खरीद लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। खाद्य विपणन विभाग ने मंडल के सभी जिलों से नमी प्रतिशत पर रिपोर्ट मांगी है, जिसे भेजकर सरकार से नमी प्रतिशत बढ़ाने की मांग की जाएगी।
मंडल के चारों जिलों में सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद शुरू हो गई है, लेकिन इस बार गेहूं में नमी अधिक होने के कारण समस्या आ रही है। क्रय केंद्रों पर अधिकतम 12 प्रतिशत नमी वाले गेहूं की खरीद करने की व्यवस्था से लेकिन किसान जो गेहूं ला रहे हैं, उसमें 23 से 25 प्रतिशत की नमी आ रही है। ऐसे में किसानों को वापस लौटाया जा रहा है। इसका सीधा असर गेहूं खरीद के लक्ष्य पर भी पड़ रहा है।
खाद्य एवं विपणन विभाग ने मंडल स्तर पर नमी की सही स्थिति जानने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। इस संबंध में हाथरस, अलीगढ़, एटा और कासगंज के खाद्य एवं विपणन विभाग व भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों से मंडी व खरीद केंद्रों पर आ रहे गेहूं में नमी, चमक की कमी और टूटन आदि की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार गेहूं खरीद के मानकों में ढील देने का निर्णय लेगी। नमी के मानकों में छूट मिलती है, तो उन हजारों किसानों को राहत मिलेगी जिनका गेहूं नमी के कारण केंद्रों पर नहीं खरीदा जा पा रहा है।
सभी जिलों से बारिश के बाद गेहूं में नमी, चमक आदि बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर क्रय केंद्रों पर छूट देने के लिए केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस रिपोर्ट के बाद ही जो भी शासन से छूट मिलेगी, उसका लाभ किसानों को दिया जाएगा।
रतन शुक्ला, आरएमओ, अलीगढ़ मंडल।