जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की कतार। संवाद
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तंबाकू और सिगरेट की लत से कैंसर सहित घातक बीमारियों का शिकंजा लगातार कस रहा है। यही कारण है कि लोग अब नशे से तौबा करने का मन बना रहे हैं। जिला अस्पताल के मन कक्ष में हर माह 10 से 15 लोग इस लत को छुड़ाने के लिए पहुंच रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक इन लोगों को काउंसिलिंग और निकोटिन गम की मदद से तंबाकू और धूम्रपालन की लत छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हर वर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को नो स्मोकिंग डे मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य लोगों को धूम्रपान व तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना है।
इस दिवस को मनाने की शुरुआत वर्ष 1984 से हुई थी। इस दिन दुनिया भर में लोगों को तंबाकू के नुकसानों के प्रति जागरूक किया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार तंबाकू के इस्तेमाल और धूम्रपान करने से कैंसर, हृदय रोग और रक्तचाप जैसी बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है। लोगों को तंबाकू के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गोष्ठी, शपथ ग्रहण समारोह व हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
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मन कक्ष में हर माह 10 से 15 लोग तंबाकू व स्मोकिंग की लत छोड़ने के लिए आते हैं। इन लोगों की काउंसिलिंग की जाती है। इस लत को छोड़ने के लिए सबसे पहले मन को मजबूत करना होता है। हम इन लोगों को निकोटिन गम की सहायता से भी तंबाकू और धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
- ललित प्रताप सिंह, मनोवैज्ञानिक, जिला अस्पताल हाथरस।