राजा दयाराम का किला न केवल एक इमारत है, बल्कि यह हाथरस के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है। यह वही किला है, जिसे धवस्त करने के लिए अंग्रेजों ने तोप से गोले दागे थे। दाऊजी मंदिर पर भी गोले दागे गए थे, लेकिन वे मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा सके। इनमें से एक गोला अभी भी संरक्षित है। अतिक्रमण में बिजली विभाग और नगर पालिका की भूमिका भी जांच के घेरे में है, क्योंकि बिना किसी वैध दस्तावेज के संरक्षित क्षेत्र में सरकारी सुविधाएं कैसे पहुंचाई गईं, यह एक बड़ा सवाल है।
गठित हुई जांच समिति
विधायक सदर अंजुला माहौर ने अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा था। इसके बाद डीएम ने चार सदस्यीय टीम गठित की है। इसमें एसडीएम सदर, सीओ सिटी, परियोजना अधिकारी डूडा व नगर पालिका के ईओ शामिल हैं। इस टीम ने 19 दिसंबर से अभिलेखों की जांच व स्थलीय सर्वे शुरू किया है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार अब तक सर्वे का एक चौथाई काम पूरा हो चुका है, जल्द ही इस काम को पूर्ण कर लिया जाएगा। सभी बिंदुओं पर जांच के बाद मकान स्वामियों को नोटिस देकर खाली करने की चेतावनी दी जाएगी। तय समय सीमा के बाद किला परिसर में बुलडोजर चलेगा। इसके बाद किले को संरक्षित कर विकसित करने की योजना पर काम होगा।
इन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित जांच
- आगमन और निवास का समय : यहां बसे परिवार मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं और किले के क्षेत्र में इन्होंने कब से डेरा डाला है?
- पूर्व निवास की जानकारी : यदि ये हाथरस के ही निवासी हैं, तो अतिक्रमण करने से पहले वे शहर के किस हिस्से में रह रहे थे?
- अनुमति और मिलीभगत : संरक्षित क्षेत्र में निर्माण किसकी अनुमति से किया गया? क्या इसमें स्थानीय अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत रही है?
- वैकल्पिक व्यवस्था : वर्तमान में यहां रह रहे लोगों के पास सिर छुपाने के लिए कोई और वैकल्पिक जगह है या नहीं?