ईद-उल-फितर के त्योहार से पहले कस्बे में नमाज को लेकर मुस्लिम पक्षों के बीच फिर से गतिरोध पैदा हो गया है। एक पक्ष चाहता है कि ईद की नमाज शाही मस्जिद के इमाम से ही पढ़ाने की व्यवस्था की जाए और दूसरे पक्ष को गतिरोध पैदा नहीं करने के लिए प्रशासन की तरफ से हिदायत दी जाए। इस पक्ष के तमाम लोग शनिवार की शाम को एसडीएम अंजुम बी से मिलने पहुंचे, लेकिन एसडीएम वहां नहीं थीं, इसलिए काफी देर इंतजार करने के बाद इन लोगों ने रोजा इफ्तार भी तहसील परिसर में ही कर लिया।
देर शाम मामले की जानकारी एसडीएम को हुई तो वह तहसील सासनी पहुंचीं और वहां दोनों पक्षों के लोगों को बुलाकर बैठक की। एसडीएम ने दोनों पक्षों को ताकीद है कि इस बारे में जो हाईकोर्ट का ऑर्डर है, काम उसी के हिसाब से होगा।
एक पक्ष के याकूब खां निवासी मोहल्ला कस्सावान की की तरफ से दी गई दरख्वास्त में कहा गया है कि वह वक्फ कब्रिस्तान और ईदगाह की देखरेख बतौर वक्फ अध्यक्ष कर रहे हैं। इसकी रंगाई-पुताई भी करवा रहे हैं। 26 जून को ईद के मौके पर सासनी ईदगाह पर ईद की नमाज होनी है, जिसे मुस्लिम शरीयत के मुताबिक शाही मस्जिद के इमाम द्वारा पढ़ा जाना ही अपेक्षित है।
परंपरा के अनुसार शाही मस्जिद के इमाम द्वारा ही नमाज अदा कराई जानी है, लेकिन 26 जून को साजिश के तहत शरीयत के विपरीत कुछ लोग कस्सावान मस्जिद सासनी के इमाम से नमाज पढ़वाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे मुस्लिम शरीयत का सरेआम उल्लंघन होगा और समाज में अशांति पैदा होने की आशंका है। उन्होंने एसडीएम से विपक्षियों को तलब कर ईदगाह पर ईद की नमाज शाही मस्जिद के इमाम से ही पढ़वाने में गतिरोध पैदा नहीं करने की हिदायत देने की मांग की है। पत्र पर कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।