मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत परिवहन निगम एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्र में अनुबंध पर निजी बसों का संचालन करने पर विचार कर रहा है। पहले चरण में अपेक्षित संख्या में बस संचालकों द्वारा रुचि न लेने के कारण दूसरे चरण से पहले डिपो के अधिकारी उनके साथ बैठक कर उनकी समस्याएं जानेंगे और बसों के अनुबंध में आ रहीं दिक्कतों को दूर कराएंगे।
योजना के तहत निजी बस संचालकों को मात्र 500 रुपये प्रतिमाह के शुल्क पर परमिट उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था, ताकि ग्रामीण क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। इसके बावजूद जिले में बस संचालकों ने योजना के प्रति उत्साह नहीं दिखाया। अधिकांश संचालकों की आपत्ति इस बात पर रही कि उन्हें केवल निर्धारित ग्रामीण मार्गों पर ही बसों का संचालन करना होगा।
उनका कहना था कि मुख्य और व्यस्त मार्गों पर संचालन की अनुमति न होने के कारण आर्थिक दृष्टि से यह व्यवस्था उन्हें लाभकारी नहीं लगी। इस कारण कई इच्छुक संचालकों ने भी आगे बढ़कर योजना में भागीदारी नहीं की। अब रोडवेज अधिकारी आवेदकों और बस संचालकों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं और सुझावों को संकलित करेंगे।
इसके बाद इन बिंदुओं को मुख्यालय भेजा जाएगा, ताकि आवश्यक होने पर नियमों और संचालन व्यवस्था में व्यवहारिक सुधार किए जा सके। डिपो के प्रभारी मंगेश कुमार का कहना है कि यदि बस संचालकों की समस्याओं का समाधान हो जाता है तो ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और गांवों की कनेक्टिविटी में भी सुधार आएगा।