भारत सरकार के डाक विभाग ने वर्ष 1974 में रावण के चित्र वाला डाक टिकट जारी किया था। शैलेंद्र वार्ष्णेय के अनुसार, रावण के साथ उसी दिन अन्य डाक टिकट भी जारी हुए थे। इनमें सूर्य, चंद्र और भगवान नरसिंह के चित्र वाले टिकट शामिल थे।
विजयदशमी पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया जाता है। भारतीय संस्कृति में उसके ज्ञान और विद्वत्ता का भी उल्लेख मिलता है। इसी पहलू को दर्शाता रावण पर जारी एक डाक टिकट है। यह डाक टिकट हाथरस के संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय सर्राफ के संग्रह में सुरक्षित है।
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भारत सरकार के डाक विभाग ने वर्ष 1974 में रावण के चित्र वाला डाक टिकट जारी किया था। शैलेंद्र वार्ष्णेय के अनुसार, रावण के साथ उसी दिन अन्य डाक टिकट भी जारी हुए थे। इनमें सूर्य, चंद्र और भगवान नरसिंह के चित्र वाले टिकट शामिल थे। सूर्य के टिकट की कीमत 20 पैसे थी। चंद्र के टिकट की कीमत 50 पैसे निर्धारित की गई थी। भगवान नरसिंह के टिकट की कीमत एक रुपये थी। रावण के चित्र वाले टिकट को दर्शाते विशेष लिफाफे भी जारी किए गए थे।
रावण का ज्ञान और मोक्ष
रावण को बुराई का प्रतीक मानने के साथ उसकी विद्वत्ता का भी स्मरण किया जाता है। संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय सर्राफ ने बताया कि भारतीय संस्कृति में बुराइयों के साथ अच्छाइयों को भी सम्मान दिया जाता है। उनके अनुसार, भगवान राम के हाथों मृत्यु को रावण और उसके परिजनों के उद्धार से जोड़ा जाता है। इसे उनके मोक्ष के रूप में भी देखा जाता है।