पिछले चार सालों में मेला श्री दाऊजी महाराज कमेटी की चूक के कारण सरकार को करीब 73 लाख रुपये का चूना लग चुका है। मेला कमेटी ने ठेकादारों से भुगतान तो ले लिया, लेकिन जीएसटी (गुड्स एवं सर्विस टैक्स) और टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) की वसूली नहीं की। संबंधित विभागों ने इस पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
मेला श्री दाऊ जी महाराज हाथरस ही नहीं आसपास के जिलों में भी विख्यात है और यहां दूर-दूर से व्यापारी और कारोबारी आते हैं। जिला प्रशासन की मेला कमेटी एक तय समयावधि के लिए बोली लगाकर ठेका छोड़ती है।
ठेकेदार मेला परिसर में लगने वाले झूले, दुकानों और खेल-तमाशों से वसूली करता है। गत वर्ष तीसरी बार मेला का ठेका एक करोड़ रुपये से ऊपर उठाया गया है। नियमानुसार ठेका उठाए जाने के बाद होने वाले भुगतान के दौरान ही जीएसटी का भी भुगतान होना चाहिए। वसूली गई रकम पर आईटीसी का लाभ लेते हुए जीएसटी का भुगतान करना चाहिए।
मेला कमेटी ने दो तरफा चूक की है। ठेकेदार से भुगतान लेते समय जीएसटी पर ध्यान नहीं दिया और मेले में लगने वाले टेंट, लाइट, साउंड, पेंट आदि का भुगतान करते समय टीडीएस नहीं काटा गया। जबकि 2.5 लाख से अधिक के किसी भी टेंडर के कुल या आंशिक भुगतान पर दो प्रतिशत टीडीएस काटना अनिवार्य है।