सहपऊ (हाथरस)। गांव मढ़ापिथू निवासी 26 वर्षीय आईटीबीपी जवान रवि बेनीवाल ने रायबरेली स्थित बटालियन परिसर में फंदा लगाकर जान दी थी। वह काफी समय से अवसाद में चल रहे थे। इससे पहले बटालियन के कमांडर ने उनके पिता से मोबाइल पर बात कर सुझाव दिया था कि वह आकर अपने बेटे को घर ले जाएं और उसे समझाएं।
यह जानकारी रायबरेली से जवान का शव लेकर आए आईटीबीपी के निरीक्षक रोशनलाल ने दी। बृहस्पतिवार की शाम को पोस्टमार्टम और अन्य अभिलेख पूरे करने के बाद बटालियन की दो गाड़ियों से उनके पार्थिव शरीर को शुक्रवार की सुबह शव गांव लाया गया। अंतिम संस्कार के बाद आवश्यक कार्यवाही करके बटालियन की टीम रायबरेली लौट गई।
शुक्रवार की सुबह छह बजे पार्थिव शरीर आते ही गांव में कोहराम मच गया। पत्नी रंजना अपने पति का पार्थिव शरीर देखकर बार-बार बेहोश हो रही थी। बड़े भाई सचिन भी बेहोश हो गए। सचिन यूपी पुलिस में हैं और वर्तमान में आगरा में तैनात हैं। रवि की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। पिता ने रोते हुए अपने पुत्र को अपने ही खेत में मुखाग्नि दी।
पिता राजन सिंह ने जब पुत्र को मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। इससे पहले रायबरेली के डलमऊ स्थित 46 आईटीबीपी बटालियन से आए निरीक्षक रोशनलाल एवं उपनिरीक्षक श्रीराम पांडेय ने जवान के ऊपर लिपटा तिरंगा जवान के पिता को भेंट किया। भाजपा नेता प्रीती चौधरी, साकेत चौधरी, जिला पंचायत सदस्य ईशान चौधरी, रवि पचौरी, प्रधान प्रतिनिधि रामकुमार, चंदन प्रधान, उम्मेद सिंह, राजू सिंह, अधिवक्ता जितेंद्र बधौतिया, वेदवीर सिंह आदि मौजूद थे।
जनप्रतिनिधियों के नहीं आने से आक्रोश
आईटीबीपी जवान रवि बेनीवाल के अंतिम संस्कार में जनप्रतिनिधियों अथवा उनके किसी प्रतिनिधि के नहीं आने से ग्रामीणों में काफी आक्रोश था। ग्रामीणों का कहना था कि जवान की मौत भले ही किसी भी प्रकार से हुई है, लेकिन वह थे तो आखिर में जवान ही।
पौने तीन महीने पहले हुई थी शादी
रवि बेनीवाल की 20 फरवरी को ही शादी हुई थी। रोते-रोते उनकी पत्नी बेहोश हो रही थी। महिलाएं उसे पानी की छींटे मारकर होश में लाने का प्रयास कर रही थीं। वह रोते हुए कह रही थी कि अभी उसने कुछ देखा ही नहीं था। वह सात मई को ही छुट्टी काटकर गए थे और कह रहे थे कि वीडियो कॉल करेंगे। उसे क्या पता था कि वह आएंगे ही नहीं।