जिले के सभी दवा विक्रेताओं को अब एंटी टीबी औषधियों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
औषधि निरीक्षक पूरनचंद ने बताया कि टीबी औषधियों की अनियंत्रित बिक्री एवं उपयोग को रोकने के लिए अत्यंत लाभकारी 13 औषधियों को एंटी टीबी औषधि की श्रेणी में रखा गया है। इससे जुड़े सभी रिकॉर्ड रजिस्टर में सुरक्षित न रखने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रति माह समस्त ब्यौरे की सूचना सीएमओ, जिला क्षय रोग अधिकारी और औषधि विभाग को भी देनी होगी।
जानकारी के मुताबिक एंटी टीबी औषधियों की अनियंत्रित बिक्री एवं अत्यधिक उपयोग और नियमानुसार दवा न लिए जाने से प्रतिरोधी टीबी रोगियों की संख्या में वृद्धि हो रही थी। इससे एंटी क्षय रोग अभियान को भी पलीता लग रहा है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली 1945 के नियम 65 के अनुसार शेड्यूल एच 1 (जिनकी बिक्री बगैर प्रेसक्रिप्शन के नहीं की जा सकती) के तहत आने वाली औषधियों के विक्रय का विवरण फुटकर औषधि विक्रेता द्वारा रजिस्टर में रक्षित करना अनिवार्य है।
13 दवाएं हैं एंटी टीबी औषधियों के रूप में शामिल
राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत इन 13 औषधियों को एंटी टीबी औषधि के रूप में शामिल किया गया है। इन औषधियों में एथियोनामाइड, एथमबुटोल हाइड्रोक्लोराइड, साइक्लोसिरीन, सोडियम पैरा अमीनो सैलिसिएट, रिफैम्पसिन, थियासिटजोन, लिवोफ्लॉक्सेसिन, रिफैबुटिन, कैप्रियोमायसिन, क्लेफैजिमाइन, मॉक्सीफ्लाक्सेसिन, पाइरेजिनामाइड, आइसोनियाजिड हैं।
सीएमओ को भेजनी होगी दवाओं की रिपोर्ट
चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक ने भी सीएमओ और डीटीओ को पत्र भेजकर निर्देशित किया है कि वह अपने जनपद के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय से संपर्क कर पत्र के साथ सलंग्र निर्धारित प्रारूप पर सभी औषधि विक्रेताओं के द्वारा उपलब्ध कराए गई सूचना को प्रत्येक माह जनपद स्तर पर संकलित कर स्टेट टीबी सेल स्वास्थ्य भवन लखनऊ को भेजें।