हजरत मोहम्मद साहब के नबासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में ऑल इंडिया शिया सोसायटी के बैनर तले अंजुमने हैदरी की जानिब से शहीदे कर्बला के चेहल्लुम की मजलिस हुई।
मौलाना ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में इंसानियत और इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी और अपने 71 जानिसारों की शहादत दी, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि यजीद हराम को हलाल और हलाल को हराम कर देना चाहता था। इमाम हुसैन ने यजीद की बात मानने से इंकार कर दिया और इंसानियत पर जुल्म करने वाले जालिम के आगे नहीं झुकने का पैगाम दिया। मजलिस के बाद अलम का जुलूस निकाला गया, जो नौहे पढ़ते हुए और मातम करता हुआ इमाम बारगाह पहुंचकर समाप्त हुआ।
अंजुमन में सदर हसन मोहम्मद, मो. मुवीन, चांद मियां, एजाज मेहंदी, कमर, मुनीर राजा, जाहिद हुसैन, आबिद हुसैन, हामिद हुसैन, जीशान, ऐनुल, रजा आदि थे।
वहीं सासनी में हजरत मौहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत में सोमवार को कस्बे में मुस्लिम समाज के लोगों ने गमगीन माहौल में चेहल्लुम का जलूस निकाला। इस दौरान हजरत इमाम हुसैन के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। उन्होंने समाज को इंसानियत का पाठ पढ़ाया था।
हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत एवं इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी एवं अपने जांनिसारों की शहादत दी थी। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसको लेकर निकाला गया अलम का जलूस मोहल्ला कस्बावान से शुरू होकर प्रमुख बाजारों से होकर करबला पर समाप्त हुआ।