गांव ततारपुर में सोमवार की सुबह निराश्रित कुत्तों ने एक तीन वर्षीय मासूम बच्ची को शिकार बनाया। कुत्तों ने इस बच्ची को घेरकर उसे बुरी तरह काटा। कुत्तों ने उसके चेहरे से मांस नोच लिया। ग्रामीणों ने जैसे-तैसे कुत्तों को भगाकर बच्ची को छुड़ाया और उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
गांव निवासी डालचंद्र की तीन वर्षीय पुत्री सृष्टि घर के पास खेल रही थी। तभी अचानक वहां घूम रहे दो कुत्तों ने उसे घेर लिया और उसे काटना शुरू कर दिया। बच्ची की चीख सुनकर परिजन व गांव के लोग मौके पर पहुंचे। तब तक कुत्ते उसके चेहरे को नोचकर उसे बुरी तरह घायल कर चुके थे। परिजन उसे तुरंत सीएचसी लेकर पहुंचे। यहां उसका उपचार किया गया।
इस घटना से ग्रामीणों में दहशत है। गौरतलब है कि रविवार को गांव पढ़ील में भी कुत्तों ने एक 11 साल की बच्ची तुलसी पुत्री हरपाल सिंह पर हमला कर दिया था, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई थी। कुत्तों ने दोनों पैर और दोनों हाथों पर काटकर उसे जख्मी कर दिया था। इस बच्ची को भी उपचार के लिए सीएचसी पर लाया गया था।
139 लोगों को कुत्तों ने बनाया शिकार
क्षेत्र में निराश्रित कुत्तों की दहशत लगातार बढ़ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर सोमवार को भी कुल 149 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने पहुंचे। इनमें 139 को कुत्ते और 10 को बंदर ने काटा था।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में सीएचसी पर एआरवी लगवाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनमें सबसे ज्यादा कुत्तों के शिकार हैं। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉक्टर पंकज कुमार ने बताया कि सर्दी के मौसम में कुत्तों की आक्रामकता बढ़ जाती है, क्योंकि इस समय वे भोजन की तलाश में इधर-उधर घूमते हैं।
उन्होंने कहा है कि कुत्ते के काटने की स्थिति में लोग घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं। इसके बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर एआरवी जरूर लगवाएं। इस मौके पर फार्मासिस्ट शैलेंद्र कुमार द्वारा पीड़ितों को एआरवी लगाई गई। संवाद