बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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शहर से लेकर देहात तक कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का सड़क पर निकलना दूभर हो गया है। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद इन खूंखार कुत्तों पर लगाम नहीं कसी जा सकी है। इसका सीधा असर जिला अस्पताल में देखने को मिल रहा है। बुधवार को 298 एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए, जिनमें से कुत्ता काटने के 116 नए मामले आए।
बुधवार की सुबह जैसे ही जिला अस्पताल का ओपीडी काउंटर खुला, वहां मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसमें बड़ी संख्या उन लोगों की थी, जिन्हें आवारा कुत्तों ने अपना निशाना बनाया था। ओपीडी से लेकर इंजेक्शन रूम के बाहर तक लंबी-लंबी कतारें नजर आईं। अपनी बारी के इंतजार में घंटों खड़े लोग स्वास्थ्य व्यवस्था और नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल उठाते दिखे।
जिला अस्पताल पहुंचे अवनीश कुमार ने बताया कि बाइक पर चलते समय उन पर कुत्ते ने हमला कर दिया। गलियों और मुख्य चौराहों पर कुत्तों के झुंड जमा रहते हैं। राहगीरों या बाइक सवारों को देखते ही ये हिंसक हो जाते हैं। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा कुत्तों की नसबंदी कराने या उन्हें पकड़ने के लिए कोई ठोस अभियान नहीं चलाया जा रहा है। इस कारण उनकी संख्या और आक्रामकता दोनों बढ़ रही है।
अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्टाफ को निर्देशित किया गया है कि किसी को भी बिना उपचार के वापस न भेजा जाए।
डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस