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हाथरस जिला अस्पताल: डॉक्टर समय पर, तो दवा काउंटर लेट, इंतजार करते रहे मरीज और तीमारदार

Fri, 19 Jun 2026 11:14 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

जिला अस्पताल में स्थायी स्टाफ के लिए लागू की गई बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था का असर साफ देखने को मिल रहा है। इसके डर से सभी चिकित्सक सुबह समय से अपने-अपने ओपीडी कक्षों में मौजूद मिले।
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दवा काउंटर खुलने का इंतजार, समय से ओपीडी में मरीज को देखते चिकित्सक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हाथरस जिला अस्पताल में कर्मचारियों की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है। बृहस्पतिवार को जहां चिकित्सक तो समय से ओपीडी में बैठकर मरीजों को परामर्श दे रहे थे, लेकिन पर्चा हाथ में लिए तीमारदार और गंभीर मरीज दवा काउंटर खुलने के इंतजार में खड़े रहे। तय समय से करीब 40 मिनट की देरी से दवा वितरण का काम शुरू हो सका, जिससे मरीजों को परेशानी हुई।

ओपीडी की तरह दवा काउंटर भी समय से खुलता है। यदि देरी हुई है तो इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही नहीं बरतने दी जाएगी।-डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस

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केस-01
लाइन में लगे-लगे तबीयत हुई खराब

कुंवरपुर निवासी 73 वर्षीय बुजुर्ग सुरेशचंद्र पिछले कुछ दिनों से वायरल बुखार, बदन दर्द और कमजोरी से परेशान थे। अस्पताल की भारी भीड़ और चिलचिलाती धूप से बचने के लिए वे सुबह आठ बजे से पहले ही जिला अस्पताल पहुंच गए थे। उन्होंने मुस्तैदी दिखाते हुए सबसे पहले पर्चा बनवाया और समय से ओपीडी में चिकित्सक को दिखा भी लिया। सुबह 8.10 बजे जब वे दवा लेने काउंटर पर पहुंचे, तो वह बंद मिला। करीब 30 मिनट से अधिक समय तक लाइन में खड़े-खड़े उनकी तबीयत खराब हो रही थी। स्टोर इंचार्ज वहां पहुंचे और दवा का वितरण शुरू किया। शेष स्टाफ उनके बाद पहुंचा।

केस-02
लहूलुहान हालत में वैशाली भी रहीं परेशान

अस्पताल की इस लेट-लतीफी का शिकार सीयल खेड़ा (अशोका टॉकीज के पास) की रहने वाली वैशाली भी हुईं। वैशाली जलेसर सड़क स्थित मैदान पर पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए सुबह दौड़ की तैयारी कर रही थीं, तभी अचानक एक आवारा कुत्ते ने उन पर हिंसक हमला कर दिया। कुत्ते के काटने से वैशाली के सीधे हाथ में गंभीर जख्म हो गए और भागने के चक्कर में गिरने से घुटने में भी चोट आई। लहूलुहान और स्ट्रेचर-बैंडेज की हालत में घायल वैशाली को भी दवा काउंटर के बाहर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
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बायोमीट्रिक व्यवस्था से डॉक्टर तो सुधरे, पर स्टाफ बेखौफ
जिला अस्पताल में स्थायी स्टाफ के लिए लागू की गई बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था का असर साफ देखने को मिल रहा है। इसके डर से सभी चिकित्सक सुबह समय से अपने-अपने ओपीडी कक्षों में मौजूद मिले और उनके कमरों के बाहर मरीजों की व्यवस्थित लाइनें भी लगी थीं, लेकिन अन्य स्टाफ समय का पाबंद नजर नहीं दिख रहा।

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