जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में महिला चिकित्सक बुधवार को अवकाश पर रहीं। इससे मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैली सिंह को खुद वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की कमान संभालनी पड़ी। बुधवार को ओपीडी में करीब 300 महिला मरीज उपचार के लिए पहुंचीं। चिकित्सक की कमी के कारण इन सभी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उमस भरी गर्मी में घंटों इंतजार के बाद मरीजों को उपचार और परामर्श मिल सका।
स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर प्रसव और सिजेरियन प्रसव तक की जिम्मेदारी एक मात्र चिकित्सक पर रहती है। बुधवार को जिस महिला चिकित्सक की ओपीडी में ड्यूटी पर थी, वह अवकाश पर रहीं। मजबूरन सीएमएस को खुद ओपीडी की कमान संभालनी पड़ी। चिकित्सकों की कमी के कारण ओपीडी में महिला मरीजों की लंबी कतार लग गई। नंबर आने को लेकर महिलाओं में आपस में नोकझोंक भी हुई। घंटों इंतजार के बाद महिला मरीजों को उपचार मिल सका।
बहू गभर्वती है। उसे उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर आई हूं। अस्पताल में आए हुए तीन घंटे हो गए। अभी तक नंबर नहीं आया है।
- गीता देवी, तीमारदार
तबीयत खराब है। उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल आई हूं। अस्पताल में आए हुए ढाई घंटा हो गया। लाइन में लगी हूं। अभी तक नंबर नहीं आया है।
- सना, मरीज
जिस चिकित्सक की आज ओपीडी में ड्यूटी थी, वह छुट्टी पर हैं। मजबूरन मुझे खुद ओपीडी में मरीज देखने पड़े। चिकित्सक की कमी के कारण मरीजों को इंतजार करना पड़ा होगा। हमारी कोशिश है कि सीमित संसाधनों में मरीजों को उचित उपचार दिया जाए।
- डॉ. शैली सिंह, सीएमएस बागला जिला महिला अस्पताल।
14 में से सिर्फ आठ चिकित्सक तैनात
जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों के 14 पद हैं, लेकिन इसके सापेक्ष महज आठ चिकित्सक ही यहां तैनात हैं। इनमें से भी दो निलंबित चल रही हैं। यहां पैथोलॉजिस्ट, एनस्थीसिया विशेषज्ञ, रेडियोलाॅजिस्ट, पीडीएमओ नहीं है।