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होलिका दहन पर विद्वानों में दो मत

Tue, 15 Mar 2016 11:57 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
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हाथरस। होलिका दहन के समय को लेकर शहर के धार्मिक विद्वानों के मतभेद बरकरार हैं। हालांकि ज्यादातर वरिष्ठ धार्मिक विद्वानों का कहना है कि होलिका दहन 23 मार्च की शाम प्रदोषकाल यानि शाम साढ़े छह बजे के करीब ही अति उत्तम और शुभ समय है। वरिष्ठ धार्मिक विद्वान ज्यादा खुलकर तो नहीं बोले, लेकिन इतना जरूर कहा कि सभी धार्मिक विद्वान आपसी मतभेद को समाप्त करें, जिससे जनता होलिका दहन के समय को लेकर भ्रमित नहीं हो। बता दें कि 23 मार्च को सरकारी अवकाश है और 24 मार्च को धूल है। धार्मिक विद्वानों के एक गुट ने होलिका दहन का समय 23 मार्च को शाम निकाला है तो दूसरे गुट ने 22/23 मार्च की तड़के सुबह साढ़े चार से पांच बजे का समय निकाला है। यह विद्वान भी अपनी राय पर कायम हैं। 
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-होली पर्व 23 मार्च को है। शाम को प्रदोषकाल दीप प्रज्ज्वलन के समय साढे़ छह बजे होलिका दहन अति उत्तम है। महिलाएं घर और बाजारों में रखी जाने वाली होली का सुबह से शाम तक किसी भी समय पूजन कर सकती हैं। होलिका दहन के विवाद से कोई मतलब नहीं है। 
- पं. सुरेश चंद्र मिश्राचार्य, वरिष्ठ विद्वान। 

- चंडु पंचांग के अनुसार 23 मार्च को शाम को 5.40 बजे तकपूर्णिमा रहेगी। पूर्णिमा हटने के बाद ही प्रदोषकाल में होलिका दहन का समय अति उत्तम और शहर और राष्ट्र के लिए लाभकारी है। होलिका दहन के समय को लेकर विवाद नहीं होना चाहिए।
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-आचार्य अतुल कृष्ण भारद्वाज

- होलिका दहन का समय 23 मार्च को प्रदोषकाल साढ़े छह बजे सबसे उत्तम है। 23 को कोई भद्रा नहीं है। सुबह घर के आंगन में होली रखकर पूजा-अर्चना करें। होलिका दहन के समय को लेकर चल रहे विवाद से कोई लेना देना नहीं है। 
- पं. आचार्य उपेंद्रनाथ चतुर्वेदी 

-23 मार्च को सरकारी अवकाश है। 23 की शाम 5 बजकर 31 मिनट पर पूर्णिमा खत्म होगी। पूर्णिमा खत्म होने की तीन घड़ी तक प्रदोषकाल में होलिका शुभ है। 22/23 की सुबह पूर्णिमा रहेगी तो होलिका दहन हो ही नहीं सकता। धार्मिक विद्वान होलिका दहन के समय को लेकर आपसी मनमुटाव खत्म करें। 
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- आचार्य पार्वती बल्लभ जी महाराज
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