हाथरस जिलेभर में रविवार को दिवाली का त्योहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पूर्व संध्या पर घर, दुकान, प्रतिष्ठान और सरकारी इमारतें सतरंगी रोशनी से जगमगा उठी हैं। शनिवार को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) मनाई गई।
इस दिन लोगों ने यम के नाम दीपदान कर सुख-समृद्धि की कामना की। त्योहार के लिए पिछले कई दिनों से चल रहीं तैयारियों को रविवार सुबह लोगों ने अंतिम रूप दिया। घरों और दुकानों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई के बाद खूबसूरत वंदनवार और रंगोलियों से सजावट की गई। रविवार को शाम ढलते ही पूरा जिला दीपों की जगमगाहट से खिल उठेगा। जगह-जगह दीपमालिकाएं सजाई जाएंगी और मंदिरों में जाकर दीपदान किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष आठ नवंबर रविवार को स्थिर लग्न और प्रदोष काल का अति शुभ संयोग मिल रहा है, जिसमें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस विधि से करें लक्ष्मी-गणेश पूजन
ज्योतिषाचार्य पंडित पंकज शास्त्री के अनुसार दिवाली के दिन अपने घरों व दुकानों के मुख्य द्वार को गेंदे के फूल की लड़ियों, अशोक, आम और केले के पत्तों के वंदनवार से सजाएं। द्वार के दोनों ओर जल से भरा मंगल कलश और नारियल स्थापित करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल पर एक चौकी पर दाहिनी ओर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीगणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियों को स्थापित करें। चौकी के बायीं ओर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर यानि अक्षत बिना टूटे चावल के नौ ढेर बनाकर नवग्रहों की स्थापना करें। वहीं, लाल कपड़े पर गेहूं या आटे से सोलह मातृका के प्रतीक बनाएं। इसके बाद गंगाजल से आचमन कर धूप, दीप, गंध, पुष्प, रोली, खील-बताशे और मिष्ठान अर्पित कर वैदिक मंत्रोच्चारण या आरती के साथ विधि-विधान से पूजन संपन्न करें।
ये हैं लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त
- गृहस्थों व व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त (प्रदोष काल व वृषभ स्थिर लग्न) : शाम 05:54 बजे से रात 07:50 बजे तक। स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी का पूजन स्थायी सुख, समृद्धि और वैभव प्रदान करने वाला माना गया है। प्रदोष काल का कुल समय शाम 05:31 बजे से रात 08:09 बजे तक रहेगा।
- व्यापार, बहीखाता व प्रतिष्ठान पूजन (कुंभ स्थिर लग्न) : दोपहर 01:27 बजे से दोपहर 02:54 बजे तक।
- शुभ चौघड़िया मुहूर्त : दोपहर 01:26 बजे से दोपहर 02:48 बजे तक तथा शाम 05:31 बजे से रात 10:27 बजे तक (शुभ, अमृत व चर चौघड़िया)।
- निशीथ व महानिशीथ काल (विशेष तंत्र व साधना के लिए) : रात 11:39 बजे से देर रात 12:31 बजे तक।
- सिंह स्थिर लग्न (मध्यरात्रि पूजन) : रात 12:25 बजे से भोर 02:42 बजे तक। इस दौरान कनकधारा स्तोत्र व श्रीसूक्त का पाठ करना विशेष फलदायी और धनदायक सिद्ध होता है।