जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आज मंगलवार को मतदान होना है। अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल बसपा-सपा दोनों खेमों के लिए आज की रात कत्ल की रात होगी। दोनों ही खेमों ने अपने अपने पक्ष में बहुमत का जुगाड़ करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों खेमे अपनी-अपनी जीत के दावे भी कर रहे हैं। लेकिन विजयश्री किसकी होगी यह तो मतदान के बाद ही साफ हो सकेगा।
जिले की जिला पंचायत में यह पहला मौका है। जब जिला पंचायत अध्यक्ष के इस अहम पद के लिए मुकाबला कांटे का हो रहा है। इससे पूर्व हुए चुनावों में जनपद निर्माण के बाद से इस पद पर बसपा का एक क्षत्र राज चलता रहा है। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बसपा-सपा के बीच हुए पहले मुकाबले में भी आंकड़ा 13-12 का ही रहा था। जिसमें बसपा प्रत्याशी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय को 13 एवं सपा प्रत्याशी ओमबती यादव को 12 मत प्राप्त हुए थे। लेकिन इसका हिसाब सपा प्रत्याशी रही ओमवती यादव ने एक साल बाद ही अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 15 मत कराकर बसपा नेताओं से चुकता कर लिया।
अब एक बार फिर मध्यावधि चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने 22 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। इस बार भी वही दोनों खेमे आमने सामने हैं। लेकिन देखना यह होगा कि बसपा अपने इस गढ़ को किस प्रकार बचाने में सफल होगी। इस चुनाव में भाजपा के पांच जिला पंचायत सदस्यों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। इसकी दो वजह हैं कि चुनाव में हारजीत का गणित इन जिला पंचायत सदस्यों के मतदान से ही तय होगा। दूसरी तरफ भाजपा प्रदेश में सत्ताधारी दल भी है। वैसे भी भाजपा सदस्यों के लिए बसपा-सपा एक जैसे ही धुर विरोधी हैं। इन हालात में भाजपाईयों की रणनीति उनकी भविष्य की राजनीति पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ेगी।