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Hathras News: नियमों की अनदेखी, दिखावे के इंतजाम...एक दमकल के भरोसे शहर

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अलीगढ़ रोड ​स्थित एक बि​ल्डिंग के बेसमैंट में खुली दुकानें। - फोटो : samvad
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शहर में व्यावसायिक गतिविधियों में सुरक्षा मानकों की हर तरफ अनदेखी की जा रही है। बिना फायर एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के कोचिंग, शॉपिंग मॉल और कारखाने चल रहे हैं। पूरा शहर ही अग्निकांड के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र बन गया है। आग लगने की स्थिति में बचाव के लिए हाथरस बस स्टैंड पर केवल एक दमकल खड़ी रहती है।
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शहर के कई व्यावसायिक परिसर और गोदामों में पहले भी भीषण अग्निकांड हो चुके हैं। इन हादसों में लाखों रुपये का नुकसान हुआ और लोगों की जान पर भी बन आई थी। इसके बावजूद न तो व्यापारी सचेत हुए हैं और न ही संबंधित विभाग कोई सख्त कदम उठा रहा है। शहर में फायर एनओसी लेने और सुरक्षा मानकों को पूरा करने का कोई चलन नहीं है।


22 फरवरी 2026 की रात सरकूलर रोड स्थित चेतन परिसर में आग लगी थी। परिसर में हवा निकासी और निर्धारित दूरी न होने से धुआं भर गया था। इससे दमकल कर्मियों को आग बुझाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक भवनों में भी आग से बचने के इंतजाम नहीं हैं।
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असुरक्षित व्यावसायिक प्रतिष्ठान
अलीगढ़ सड़क पर अक्रूर इंटर कॉलेज के पास एक भवन में भू-तल पर रेस्टोरेंट संचालित है। इसकी भट्टी सड़क पर रखी रहती है और इसके ऊपर कोचिंग सेंटर चल रहा है। यदि लखनऊ जैसा कोई हादसा हुआ तो सबसे पहले निकास ही बाधित होगा।
मुंशीगजाधर सिंह मार्ग पर ग्रामीण बैंक के ऊपर एक ग्राहक सेवा केंद्र है। यहां रोजाना 50 से 60 युवा नौकरी करते हैं, लेकिन नीचे उतरने के लिए संकरा रास्ता है। इंडस्ट्रियल एरिया चौकी के सामने एक इमारत में साड़ी प्रदर्शन कक्ष के ऊपर दो मंजिला रेस्टोरेंट है। यहां भी निकलने का रास्ता संकरा है, जो बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

हर पल रहता खतरे का डर
शहर के 17 पुराने कॉम्प्लेक्स ऐसे हैं, जहां सुरक्षा के नाम पर एक मानक भी पूरा नहीं किया गया है। तंग गलियों और बिना वेंटिलेशन व सैट बैक के बने ये कांप्लेक्स बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।अलीगढ़-आगरा मार्ग पर तीन बड़े प्रतिष्ठित विभागीय स्टोर ने अग्नि सुरक्षा प्रणाली लगाकर एनओसी तो ले ली है। हालांकि, धरातल पर उनमें निर्धारित दूरी और आपातकालीन निकास की सुविधा नही है। अलीगढ़ सड़क स्थित एक बड़े विभागीय स्टोर को मार्च 2026 में खामियों के लिए नोटिस दिया गया था।

रिहायशी इलाकों में चल रहे कारखाने
शहर के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर पुरानी कारखाने चल रहे हैं। इनके पास कोई एनओसी नहीं है। संकरी गलियों के कारण हादसे के समय दमकल का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। पिछले वर्ष 22 अक्तूबर को नवीपुर में कालीन कारखाने में आग लगने पर यही दिक्कत सामने आई थी। इन कारखानों पर भी फायर एनओसी नहीं है।
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