सम्मेलन में काव्य पाठ करतीं कवयित्री। संवाद
लक्खी मेला श्री दाऊजी महाराज के मुक्ताकाशीय मंच पर शनिवार की रात एक शाम अटलजी के नाम अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। वरिष्ठ कवि हरिनाम सांचा ने पूर्व प्रधानमंत्री के विराट व्यक्तित्व और पोखरण परमाणु परीक्षण के अदम्य साहस को नमन करते हुए सुनाया कि लगने न दिया दाग देश की प्रधानी पर, कसी राष्ट्र प्रेम की लंगोट अटल बिहारी ने..।
सम्मेलन में देश भर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए राष्ट्रप्रेम, संवेदना, ओज और गुदगुदाते हास्य की ऐसी त्रिवेणी बहाई कि श्रोता आधी रात के बाद तक तालियां बजाते रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक गोविंद ने किया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय एवं विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय मंचासीन रहे। आयोजन का कुशल संयोजन तरुण शर्मा, सह-संयोजन प्रवीन खण्डेलवाल तथा निर्देशन जय शर्मा द्वारा किया गया। सम्मेलन का शानदार मंच संचालन प्रख्यात कवि डॉ. नितिन मिश्र ने संभाला।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने जब अपनी मखमली आवाज में मानवीय संवेदनाओं और मूल्यों की बात कही, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने सुनाया कि जो हाथ थाम लो वो फिर न छूटने पाये, प्यार की दौलतें कोई न लूटने पाये, जब भी छू लो बुलंदियां तो ध्यान ये रखना, ज़मीं से पांव का रिश्ता न टूटने पाये। युवा चेतना और राष्ट्रभक्ति के तीखे स्वरों को मंच देते हुए इटावा के कवि गौरव चौहान ने हालिया सामाजिक विकृतियों पर सीधा प्रहार किया। वीर रस के प्रखर हस्ताक्षर कवि राम भदावर ने सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वाभिमान को जगाया।
मंच संचालक डॉ. नितिन मिश्र ने किया। लखनऊ से आए हास्य कवि दुर्गेश तिवारी ने वैश्विक राजनीति और पेट्रोल के दामों पर गुदगुदाते हुए कहा कि तो पेेट्रोल कीमतों की चिंता ही खत्म होगी, बात ये दिमाग में महीन डाल दीजिए, आप लोग गाड़ियों से इंजन निकाल कर, गन्ने वाले रस की मशीन डाल दीजिए।