रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव सहित कई अंतरराष्ट्रीय झगड़ों ने यूरोप और एशिया के बाजारों में आयात क्षमता को कमजोर कर दिया है। पहले जहां यूरोप और अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऑर्डर आते थे, वहीं अब ये ऑर्डर 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। इससे जिले के मेटल हैंडीक्राफ्ट और कालीन उद्योग को सीधा झटका लगा है।
विदेशी नीतियों में बदलाव से बढ़ीं मुश्किलें
कई देशों ने आयात पर नए नियम लागू किए हैं। पर्यावरण मानकों की कड़ी शर्तें, अधिक निरीक्षण, बढ़े हुए आयात शुल्क और बदलती टैक्स नीतियों के कारण हाथरस के उद्योगपतियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से मुकाबला करना कठिन हो रहा है। बड़ी कंपनियों ने ऑर्डर कम कर दिए हैं और छोटी कंपनियां बढ़ती लागत के कारण प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही हैं।
स्थानीय उद्योग पर असर
हाथरस का मेटल उद्योग, होम डेकोर, कारपेट, ब्रास आइटम, ग्लास उत्पाद विदेशी खरीदारों के बीच काफी लोकप्रिय थे। गिरती मांग ने कारीगरों की आमदनी कम कर दी है। कई छोटे यूनिट बंद होने की कगार पर हैं, जबकि श्रमिकों का पलायन भी बढ़ रहा है।
यह हैं हाथरस से निर्यात के आंकड़े
वित्तीय वर्ष कारोबार
2021-22 2,61,05,29,500 रुपये
2022-23 2,26,09,65,240 रुपये
2023-24 1,99,59,93,149 रुपये
2024-25 1,75,43,46,260 रुपये