रंज-ओ-गम के माहौल में ताजिये सुपुर्द-ए-खाक
मोहर्रम की दस तारीख को निकाले ताजिये और अलम के जुलूस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। मोहर्रम की दस तारीख को हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहर में मंगलवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा ताजियों और अलमों के जुलूस निकाले गए। शहर के अलग-अलग इलाकों से निकले यह जुलूस घंटाघर पहुंचकर एक हो गए। यहां से एक साथ मुरसान गेट स्थित करबला पहुंचे। वहां रंज-ओ-गम के माहौल में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने मर्सिये और नौहे पढ़कर माहौल को गमजदां कर दिया। लोगों की आंखें भर आईं। इस मौके पर शिया नौजवानों ने जहां छुरियाें और जंजीरों से मातम कर अपने जिस्म को लहूलुहान कर दिया। वहीं सुन्नी अकीदमंद भी छाती पीटकर इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत का रंज मना रहे थे। शहर में कई स्थानों पर लोग जाम से जूझते रहे। ताजियों के यह जुलूस किला गेट, लाला का नगला, कैलाश नगर आदि इलाकों से निकाले गए।
अलग-अलग रास्तों से होते हुए यह जुलूस घंटाघर पहुंचकर एक हो गए। जुलूस के साथ चल रहे अकीदतमंद इमाम हुसैन और उनके 71 जानिसारों की शहादत याद में मर्सिये और नौहे गाकर माहौल गमगीन बना रहे थे। नौजवान भी छाती पीटकर मातम करते हुए हुसैन की सदाएं बुलंद कर रहे थे। एहतियातन काफी पुलिस फोर्स भी जुलूसों के साथ रहा। कोतवाली सदर और हाथरस गेट एसओ की अगुवाई में पुलिस और पीएसी के जवान सुरक्षा घेरा बनाकर चल रहे थे।