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Hathras News: ब्रज की देहरी को नहीं मिली प्रदूषण से मुक्ति

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बृज की देहरी को प्रदूषण से आजादी नहीं मिल रही। ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में आने के बावजूद यहां सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश के कोई मायने नहीं हैं। औद्योगिक क्षेत्र तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन अधिकांश इकाइयों के पास प्रदूषण रोकने के उपाय नहीं है। जिले में पर्यावरण सुरक्षा व संरक्षण के तमाम वादे कागजों में ही सिमटकर रह गए हैं।








पर्यावरण संपदा को सहेजने के तमाम दावे धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। शहर में गंदगी, जलभराव की बात हो या फिर दूषित भूगर्भ जल की, स्थिति चिंताजनक है। हर साल जिले में लाखों पौधे जिले को हरा-भरा करने के लिए लगाए जाते हैं। इस बार भी 25 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। पिछले बीस सालों में हर साल पौधरोपण होता है, लेकिन फिर भी जिले में हरियाली नजर नहीं आती।
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लगातार गिर रहा भूजल स्तर

भूगर्भ जल स्तर में गिरावट इस जिले में बड़ी समस्या है। लगातार भूजल स्तर गिर रहा है। हसायन को छोडकर सभी ब्लॉक क्रिटिकल श्रेणी में आ चुके हैं। 60 से ज्यादा गांवों के लोग तो खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। यहां का पानी पीने लायक भी नही हैं। नलकूप और सबमर्सिबल धरती की कोख को खोखला कर रहे हैं। इस समय तो यहां 200 फीट तक बोरिंग पर पानी मिलता है। धरती से पानी का लगातार दोहन तो हो रहा है लेकिन वर्षा जल संरक्षण पर काम होता नजर नहीं आता।









नालों तब्दील हो चुकी हैं नदियां

कभी सादाबाद की पहचान रही करवन नदी आज विलुप्त होने के कगार पर है। कभी यह नदी लोगों की प्यास बुझाने के साथ किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध कराती थी। साथ भूजल स्तर को भी बढ़ाती थी। नदी में गंदगी, सिल्ट और प्रदूषित जल को देखकर नहीं लगता कि यह नदी कभी किसानों को सिंचाई के लिए पानी और लोगों की प्यास बुझाती थी।







करवन नदी की हालत देखकर लोग आहत हैं, क्योंकि इसमें सिल्ट, कूड़ा करकट, दूषित जल नजर आता है। करवन नदी कुछ समय पहले आवारा पशुओं के पानी पीने, किसानों के लिए सिंचाई और लोगों की भी प्यास बुझाती थी। अब तो इसका जल प्रदूषित हो गया। जल संरक्षण के लिए गंगा समितियां बनाई जा रही हैं।ऐसा ही हाल सेंगर नदी का है। वहीं शहर के आगरा रोड स्थित बंबे में भी गंदगी व्याप्त है।







-वन विभाग द्वारा लगाए गए पोधे सुरक्षित हैं, पौधों की जीओ टैगिंग सभी विभागों ने कर दी है। सभी विभागों द्वारा पौधों की निगरानी रखी जा रही है। पर्यावरण के लिए पौधे बहुत जरुरी है।

डॉ. सीपी सिंह, डीएफओ।











राशि के अनुसार लगाएं पौधे, पर्यावरण सुधरने के साथ किस्मत भी चमकेगी

हाथरस।पेड़-पौधे ऐसी सम्पदा हैं जो मनुष्य को हर प्रकार से लाभ पहुंचाते हैं। ये वातावरण को शुद्ध रखने के साथ ही हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की राशि किसी न किसी वृक्ष का प्रतिनिधित्व करती है। हम बिगड़े ग्रह नक्षत्रों सुधारने के लिए अपने घर में नक्षत्र के अनुसार पेड़ लगा सकते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मेष राशि वाले जातक को आंवला, वृष के लिए जामुन,धनु के लिए पीपल लगा सकते हैं। मकर के लिए शीशम, कुंभ के लिए खैर या शमी,मिथुन के लिए कटहल, कर्क के लिए नागकेशर,सिंह के लिए बेल, कन्या के लिए आम, तुला के लिए सफेद पलाश, वृश्चिक के लिए केला, बरगद व मीन राशि वालों को नीम या पीपल को पेड़ लगाना चाहिए। धर्माचार्यों का कहना है कि कभी भी हरे भरे पेड़ों को नहीं काटना चाहिए। नागचंपा,अशोक,जूही, अर्जुन, नारियल आदि के पौधे या पेड़ लगाना सभी राशियों के लिए शुभ माना जाता हैं। पीपल, बरगद, नीम, पाकड, गूलर, के पौधे ज्यादा से ज्यादा संख्या में लगाने चाहिए।

-राशि के अनुसार पौधे लगाने चाहिए। पौधे लगाने से सुख समृद्धि आती है। पौधे हमारे जीवन का एक अंग हैं। राशि के साथ साथ पर्यावरण में पौधों की अधिक महत्वता है। आचार्य बल्लभ जी महाराज
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-पौधों के जरिए पर्यावरण में ऑक्सीजन का संतुलन बना रहता है। पीपल का पौधा सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला पौधा है। नहरों व नदियों के किनारे ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण किया जाना चाहिए। कुछ पौधे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाता हैं। इंद्रसेन नाथ, भूमि संरक्षण अधिकारी।
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