क्षेत्र के गांव ईसेपुर से गुजरात के सूरत शहर में मजदूरी करने गए मजदूर की गरीबी के कारण उचित इलाज न मिलने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह जिस कारखाने में काम कर रहा था, उसमें नोटबंदी के कारण उसकी छंटनी कर दी गई थी।
इससे वह बेरोजगार होकर परेशान रहने लगा था। उसके साथ रह रहा उसका 13 साल का बेटा एंबुलेंस से शव लेकर गांव आया। परिवार में हालात इतने बदतर हैं कि इस एंबुलेंस का भाड़ा भी ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित करके दिया।
ईसेपुर का हाकिम सिंह अपने पुत्र के साथ जीविका चलाने के लिए कुछ समय पूर्व सूरत चला गया था। वह वहां एक निजी कारखाने में काम करने लगा। वहां नकद मजदूरी मिलती थी। नोटबंदी के बाद नकदी की तंगी की वजह से कारखाने की वह यूनिट बंद हो गई, जिसमें वह काम करता था। इससे हाकिम सिंह की छंटनी कर दी गई।
कुछ दिन तक तो वह किसी तरह गुजारा करता रहा, लेकिन वहां उसकी तबियत अचानक खराब हो गई। पैसे न होने के कारण उसे सूरत के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद हाकिम की मौत हो गई।
उसके बेटे के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह पिता का शव का गांव ला पाता। एक रिश्तेदार की मदद से भाड़े पर एंबुलेंस लेकर वह शव को लेकर गांव ले आया। यहां पहुंचने पर गांव वालों ने पैसा इकट्ठा कर वाहन भाड़े का भुगतान किया।
मृतक के परिवार को सांत्वना प्रकट करने के लिए कई नेता पहुंचे पर किसी ने भी उनकी गरीबी पर तरस खाकर एक भी रुपये की मदद नहीं की। सांत्वना प्रकट करने वालों में बसपा प्रत्याशी बनी सिंह बघेल, मित्रेश चतुर्वेदी, संजय दत्त बघेल, जितेंद्र चौधरी, यतेंद्र बघेल, इंद्रपाल बघेल, सुरेश, आशीष दीक्षित, रनवीर बघेल, हरीश प्रधान, केके शर्मा आदि थे।